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ड्यूटियों को लेकर शिक्षकों पर लटकी तलवार, विभाग ने जारी की सख्त चेतावनी

चंडीगढ़। राजवीर दीक्षित

(“Sword Hanging Over Teachers Regarding Duty Assignments; Department Issues Strict Warning “) पंजाब में शिक्षकों की गैर-शैक्षणिक ड्यूटियों को लेकर विवाद एक बार फिर गहरा गया है। ड्रग एंड सोशल-इकोनॉमिक जनगणना (सेंसस) के लिए बुलाई गई मैपिंग और ट्रेनिंग बैठक में बड़ी संख्या में शिक्षकों के अनुपस्थित रहने के बाद शिक्षा विभाग और जिला प्रशासन ने सख्त रुख अपना लिया है। विभाग ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि निर्धारित ड्यूटी जॉइन नहीं करने वाले शिक्षकों और संबंधित स्कूल प्रमुखों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जा सकती है।

दूसरी ओर, शिक्षक संगठनों ने इस कार्रवाई का विरोध करते हुए प्रशासन पर तानाशाही रवैया अपनाने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि शिक्षकों पर लगातार गैर-शैक्षणिक कार्यों का बोझ बढ़ता जा रहा है। बीएलओ ड्यूटी, विभिन्न सरकारी योजनाओं का सर्वे, ड्रग एवं सोशल-इकोनॉमिक सेंसस, कंट्रोल रूम, स्वास्थ्य योजनाएं और अन्य प्रशासनिक जिम्मेदारियों के कारण बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। शिक्षकों का दावा है कि गर्मी की छुट्टियों में भी लगातार ड्यूटी लगाई गई, इसके बाद नीट परीक्षा और अन्य परीक्षाओं की जिम्मेदारी दी गई, जबकि अब ऑनलाइन मार्किंग ट्रेनिंग का दबाव भी बनाया जा रहा है।

शिक्षकों ने यह भी आरोप लगाया कि ड्रग एंड सोशल-इकोनॉमिक सेंसस के नाम पर सरकारी संसाधनों का राजनीतिक प्रचार के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है। उनका कहना है कि पहले ड्यूटी को स्वैच्छिक बताया जाता है, लेकिन मौके पर पहुंचने पर जबरन सहमति फॉर्म भरवाए जाते हैं और अनुपस्थित रहने पर नोटिस की चेतावनी दी जाती है।

फिलहाल विभाग अपने फैसले पर कायम है, जबकि शिक्षक संगठनों ने साफ कर दिया है कि यदि गैर-शैक्षणिक ड्यूटियों का बोझ कम नहीं किया गया तो वे विरोध तेज करेंगे। अब सबकी नजर इस बात पर है कि प्रशासन और शिक्षकों के बीच यह टकराव किस दिशा में आगे बढ़ता है।

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