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‘सतलुज’ फिल्म पर राजनीति न हो, हिंदू-सिख एकता पर इकबाल सिंह लालपुरा का बड़ा बयान !

चंडीगढ़ । राजवीर दीक्षित

(‘Don’t Politicize the Film Sutlej‘: Iqbal Singh Lalpura Issues Strong Statement on Hindu-Sikh Unity)पूर्व राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष और भाजपा संसदीय बोर्ड के वरिष्ठ सदस्य इकबाल सिंह लालपुरा ने सोमवार को कहा कि दिलजीत दोसांझ अभिनीत फिल्म ‘सतलुज’ को किसी भी राजनीतिक दल को राजनीति का मुद्दा नहीं बनाना चाहिए। उन्होंने कहा कि पंजाब के सभी राजनीतिक नेताओं की जिम्मेदारी है कि वे हिंदू-सिख एकता को मजबूत करने के लिए काम करें।

लालपुरा ने एक दिन पहले भाजपा नेता रवनीत सिंह बिट्टू से फिल्म में दिखाए गए मौतों के आंकड़ों पर सवाल उठाना बंद करने की अपील की थी। उन्होंने कहा कि इन मामलों में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग द्वारा मुआवजे से जुड़े आदेश पहले ही जारी किए जा चुके हैं।
उन्होंने कहा कि पंजाब में आतंकवाद के दौर में जो कुछ हुआ, वह उस समय की सरकार की नीतिगत विफलताओं का परिणाम था। इस दौरान उन्होंने कांग्रेस पर अप्रत्यक्ष रूप से निशाना साधा।

लालपुरा ने कहा कि अब समय पंजाब के जख्मों पर मरहम लगाने का है, न कि पुराने मुद्दों पर राजनीति करने का। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का हवाला देते हुए कहा कि हिंदू-सिख एकता और पंजाब की सांप्रदायिक सौहार्द बनाए रखना सबसे बड़ी प्राथमिकता होनी चाहिए।
उन्होंने कहा, “पंजाब में गैर-कांग्रेसी दलों का हमेशा यही प्रयास रहा है कि सिख और हिंदू समुदाय के बीच भाईचारा बना रहे और प्रदेश की सांप्रदायिक एकता मजबूत हो।”

इकबाल सिंह लालपुरा, जो 20 सितंबर 1981 को जरनैल सिंह भिंडरावाले की गिरफ्तारी के लिए भेजे गए तीन अमृतधारी सिख पुलिस अधिकारियों में शामिल थे, ने उस समय की घटनाओं को याद करते हुए कहा कि 9 सितंबर 1981 को लाला जगत नारायण की हत्या के बाद भिंडरावाले 13 सितंबर को आत्मसमर्पण करने को तैयार थे, लेकिन इसे 20 सितंबर तक टाल दिया गया।

उन्होंने सवाल उठाया कि आत्मसमर्पण क्यों टाला गया? उन्होंने कहा कि बाद में भिंडरावाले को मेहता चौक स्थित दमदमी टकसाल मुख्यालय से उस समय गिरफ्तार किया गया, जब वे बड़ी सभा को संबोधित कर चुके थे। इसके बाद हिंसा हुई और 15 अक्टूबर 1981 को उन्हें रिहा कर दिया गया।

लालपुरा ने कहा, “अगर उन्होंने कुछ गलत नहीं किया था तो उन्हें गिरफ्तार क्यों किया गया, और अगर उन्होंने गलत किया था तो फिर उन्हें रिहा क्यों किया गया? इन सवालों का जवाब उस समय की सरकार को देना चाहिए था।”

अंत में उन्होंने कहा कि आज पंजाब को राजनीतिक विवादों की नहीं, बल्कि आपसी विश्वास, शांति और भाईचारे की जरूरत है।

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