Home Chandigarh पेपर लीक विवाद में बड़ा एक्शन! BFUHS भर्ती सेल  प्रभारी हटाई गईं, विश्वविद्यालय में बड़े स्तर पर प्रशासनिक फेरबदल

पेपर लीक विवाद में बड़ा एक्शन! BFUHS भर्ती सेल  प्रभारी हटाई गईं, विश्वविद्यालय में बड़े स्तर पर प्रशासनिक फेरबदल

फरीदकोट। राजवीर दीक्षित
(Major Action in Paper Leak Row! BFUHS Recruitment Cell In-charge Removed; University Undergoes Large-Scale Administrative Reshuffle)बाबा फरीद यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंसेज (BFUHS) में फार्मेसी ऑफिसर भर्ती परीक्षा के कथित पेपर लीक मामले के बीच बड़ा प्रशासनिक फैसला लिया गया है। विश्वविद्यालय की भर्ती सेल की प्रभारी प्रोफेसर डॉ. नीतू कुकर को उनके पद से हटा दिया गया है। यह कार्रवाई पेपर लीक विवाद के बीच हुई है, जिससे विश्वविद्यालय के प्रशासनिक तंत्र में हलचल मच गई है।

डॉ. नीतू कुकर, जो गुरु गोबिंद सिंह मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (GGSMCH) के ब्लड बैंक विभाग की प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष हैं, विश्वविद्यालय में कई अहम जिम्मेदारियां संभाल रही थीं। भर्ती सेल की प्रभारी होने के साथ-

साथ वह GGSMCH की मेडिकल सुपरिटेंडेंट, BFUHS के एस्टैब्लिशमेंट विंग की प्रभारी और मेडिकल कॉलेज की मल्टी-डिसिप्लिनरी रिसर्च यूनिट की प्रमुख भी थीं।

उनकी जगह डॉ. अमरबीर सिंह बोपाराय को गुरु गोबिंद सिंह मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल का नया मेडिकल सुपरिटेंडेंट नियुक्त किया गया है।

BFUHS में बड़े स्तर पर प्रशासनिक फेरबदल-
इसी के साथ विश्वविद्यालय के शीर्ष प्रशासन में भी महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं। डॉ. राजीव सूद का तीन वर्षीय कार्यकाल कुलपति (Vice-Chancellor) के रूप में पूरा होने के बाद मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च विभाग के सचिव डॉ. मनजीत सिंह बराड़ को विश्वविद्यालय के कार्यवाहक कुलपति का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है।

इसके अलावा, BFUHS बोर्ड ऑफ मैनेजमेंट ने रजिस्ट्रार अरविंद कुमार को भी उनके पद से कार्यमुक्त कर दिया है। उनकी जगह राजिंद्रा मेडिकल कॉलेज, पटियाला के ऑर्थोपेडिक्स विभाग के प्रमुख डॉ. गिरीश साहनी को कार्यवाहक रजिस्ट्रार का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है।

रजिस्ट्रार की नियुक्ति भी रही थी चर्चा में-

गौरतलब है कि अरविंद कुमार, जो दिल्ली से हैं और मेडिकल पृष्ठभूमि से नहीं आते, उन्हें पूर्व कुलपति डॉ. राजीव सूद ने रजिस्ट्रार नियुक्त किया था। यह नियुक्ति विश्वविद्यालय की उस परंपरा से अलग थी, जिसके तहत आमतौर पर मेडिकल क्षेत्र से जुड़े अधिकारियों को ही रजिस्ट्रार बनाया जाता रहा है।
पेपर लीक विवाद के बीच हुए इन बड़े प्रशासनिक बदलावों को विश्वविद्यालय में जवाबदेही तय करने और व्यवस्था में सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

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