चंडीगढ़। राजवीर दीक्षित
(“Pharmacy Officer Exam Scam: Two Main Accused Surrender, Court Sends Them to Police Custody “) 19 जुलाई को आयोजित 454 पदों की फार्मेसी ऑफिसर भर्ती परीक्षा में सामने आए हाई-टेक नकल गिरोह मामले में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। इस घोटाले के दो मुख्य आरोपी हरियाणा के भिवानी निवासी आयुष और सज्जन कुमार ने ड्यूटी मजिस्ट्रेट की अदालत में आत्मसमर्पण कर दिया। दोनों ने अदालत में दायर आवेदन में खुद को बेगुनाह बताते हुए कहा कि उन्हें झूठा फंसाया गया है और वे जांच एजेंसियों के साथ पूरा सहयोग करेंगे। अदालत ने दोनों आरोपियों को चार दिन की पुलिस रिमांड पर भेज दिया है ताकि मामले की गहन जांच की जा सके।
पुलिस पूछताछ के दौरान किसी भी तरह की शारीरिक प्रताड़ना या थर्ड डिग्री इस्तेमाल किए जाने की आशंका जताते हुए दोनों आरोपियों ने अदालत से रोजाना मेडिकल जांच कराने और उसकी रिपोर्ट न्यायिक रिकॉर्ड में शामिल करने की भी मांग की। गौरतलब है कि दो दिन पहले ही पुलिस ने आयुष, सज्जन कुमार और तीसरे आरोपी बलविंदर सिंह उर्फ मास्टरे के खिलाफ गैर-जमानती वारंट हासिल किए थे।

पुलिस जांच के अनुसार यह मामला पेपर लीक का नहीं, बल्कि परीक्षा के दौरान रियल-टाइम तकनीक से नकल कराने वाले अंतरराज्यीय गिरोह का है। आरोप है कि परीक्षा शुरू होने के कुछ देर बाद आयुष ने छिपे हुए पेन कैमरे से प्रश्नपत्र की तस्वीरें लेकर व्हाट्सएप के जरिए सज्जन कुमार को भेजीं। इसके बाद भिवानी से प्रश्नपत्र फरीदकोट में बनाए गए कंट्रोल रूम पहुंचा, जहां विशेषज्ञों ने प्रश्न हल कर माइक्रो ईयरपीस और मॉडिफाइड वायरलेस डिवाइस के जरिए परीक्षा केंद्रों में बैठे उम्मीदवारों तक उत्तर पहुंचाए।
जांच में खुलासा हुआ है कि यह गिरोह उम्मीदवारों से 3.5 लाख से 13 लाख रुपये तक वसूलता था और भुगतान सुनिश्चित करने के लिए पोस्ट-डेटेड चेक भी लेता था। अब तक इस मामले में 38 लोगों को गिरफ्तार या हिरासत में लिया जा चुका है, जिनमें 25 अभ्यर्थी और 13 संचालक व सहयोगी शामिल हैं। पुलिस ने 38 मॉडिफाइड मोबाइल फोन, 21 छिपे हुए वायरलेस ईयरपीस और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण भी बरामद किए हैं। यह मामला भर्ती परीक्षाओं की सुरक्षा व्यवस्था और तकनीकी निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।



















