टारगेट न्यूज़ ब्यूरो: सुप्रीम कोर्ट ने बिल्डरों और रियल एस्टेट कंपनियों द्वारा जजों के खिलाफ की जा रही गुमनाम शिकायतों के चलन पर गंभीर रुख अपनाया है। शीर्ष अदालत ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि न्यायपालिका की गरिमा को ठेस पहुंचाने वाली ऐसी हरकतें बर्दाश्त नहीं की जाएंगी। अदालत ने इस प्रवृत्ति को न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित करने का एक ‘खतरनाक प्रयास’ करार दिया है।
न्यायपालिका की स्वतंत्रता पर प्रहार
सुनवाई के दौरान बेंच ने सख्त लहजे में कहा कि बिल्डर लॉबी अक्सर अपने पक्ष में फैसला न आने पर जजों को निशाना बनाने के लिए गुमनाम पत्र या शिकायतें भेजती है। कोर्ट ने कहा कि यह न केवल जजों का मनोबल गिराने का प्रयास है, बल्कि यह न्याय प्रणाली की निष्पक्षता पर भी सवाल उठाने की एक सोची-समझी साजिश है।
न्यायिक अधिकारियों के खिलाफ बिना किसी ठोस आधार के गुमनाम शिकायतें करना न्यायपालिका की स्वतंत्रता को कमजोर करने का प्रयास है। हम ऐसी गतिविधियों को किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं करेंगे।
मुख्य बिंदु
- सुप्रीम कोर्ट ने बिल्डरों की कार्यशैली को अनुचित बताया।
- गुमनाम शिकायतों के पीछे छिपे उद्देश्यों की जांच के संकेत दिए गए।
- न्यायपालिका की गरिमा बनाए रखने के लिए सख्त दिशा-निर्देशों पर विचार।
- अदालत ने स्पष्ट किया कि कानून का शासन सर्वोपरि है।
आगे की राह
शीर्ष अदालत ने संबंधित पक्षों को चेतावनी दी है कि यदि भविष्य में इस तरह की शिकायतें सामने आती हैं, तो उनके खिलाफ अवमानना की कार्रवाई की जा सकती है। कोर्ट ने यह भी कहा कि अगर किसी को किसी जज के आचरण पर आपत्ति है, तो उसके लिए उचित कानूनी प्रक्रिया मौजूद है, न कि गुमनाम पत्र लिखकर दबाव बनाना।



















