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कोर्ट ने 2 करोड़ रुपये से अधिक के डिजिटल अरेस्ट मामले में आरोपी की जमानत याचिका खारिज की

चंडीगढ़। राजवीर दीक्षित

(Court Rejects Bail Plea of Accused in Digital Arrest Case Involving Over ₹2 Crore) चंडीगढ़ अदालत ने 2 करोड़ रुपये से अधिक के चर्चित डिजिटल अरेस्ट मामले में आरोपी श्रुत मोहन नरगेटा, निवासी जीरकपुर, जिला एसएएस नगर (मोहाली), की जमानत याचिका खारिज कर दी है। आरोपी को पुलिस ने साइबर धोखाधड़ी के इस मामले में गिरफ्तार किया था।

मामले में पुलिस ने सेक्टर-49, चंडीगढ़ निवासी जरनैल सिंह बनवैत की शिकायत पर FIR दर्ज की थी। शिकायतकर्ता ने बताया कि वह इंग्लैंड में कारोबार करते हैं। वह 20 जनवरी 2026 को पत्नी के साथ भारत आए थे, जबकि उनके बच्चे इंग्लैंड में रहते हैं।

शिकायत के अनुसार, 27 फरवरी 2026 को उन्हें एक अज्ञात नंबर से फोन आया। कॉल करने वाले ने एक मोबाइल नंबर के बारे में जानकारी मांगी और खुद को वरिष्ठ अधिकारी विजय खन्ना की ओर से फोन करने वाला बताया। इसके बाद शिकायतकर्ता को वीडियो कॉल में शामिल होने के लिए कहा गया।

वीडियो कॉल के दौरान शिकायतकर्ता पर आरोप लगाया गया कि उन्होंने अपना आधार कार्ड नरेश गोयल (जेट एयरवेज) को बेच दिया है। गिरफ्तारी और कानूनी कार्रवाई की धमकी देकर उनसे दो बैंक खातों और सात फिक्स्ड डिपॉजिट की जानकारी हासिल कर ली गई।

इसके बाद उन्हें लगातार डराया-धमकाया गया और RTGS के जरिए अलग-अलग खातों में रकम ट्रांसफर करने के लिए मजबूर किया गया। 2 मार्च से 20 मार्च 2026 के बीच शिकायतकर्ता से कुल 2,05,52,584 रुपये ट्रांसफर करवाए गए।

जांच एजेंसी ने लेन-देन की पूरी कड़ी खंगालते हुए उन बैंक खातों की जानकारी जुटाई, जिनमें धोखाधड़ी की रकम पहुंची थी। जांच के दौरान पुलिस ने मामले में छह आरोपियों को गिरफ्तार किया है।

आरोपी के वकील ने अदालत में दलील दी कि उनके मुवक्किल को झूठा फंसाया गया है और उसके खिलाफ कोई स्पष्ट भूमिका सामने नहीं आई है। वहीं, सरकारी वकील ने जमानत का विरोध करते हुए कहा कि सभी आरोपियों ने आपराधिक साजिश के तहत शिकायतकर्ता को डिजिटल तरीके से अरेस्ट करने का भय दिखाया और उससे करीब 2.05 करोड़ रुपये ट्रांसफर करवाए।

अभियोजन पक्ष के अनुसार, आरोपी ने सह-आरोपी अनिकेत को दो मोबाइल फोन और एक सिम कार्ड उपलब्ध कराया था। अनिकेत के खुलासे के आधार पर ही वर्तमान आरोपी की गिरफ्तारी की गई।

दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने जमानत याचिका खारिज कर दी। अदालत ने कहा कि इस तरह के मामले लगातार बढ़ रहे हैं और इनका समाज पर गंभीर प्रभाव पड़ रहा है। साइबर अपराधों को सामान्य IPC या अन्य पारंपरिक अपराधों की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता, क्योंकि इन्हें तकनीक की अच्छी जानकारी रखने वाले लोग अंजाम देते हैं।

अदालत ने टिप्पणी की कि ऐसे अपराधों में आरोपी अलग-अलग स्थानों पर बैठकर हैकिंग, रिकॉर्ड में हेरफेर, फर्जी खाते तैयार करने और रकम को अलग-अलग खातों में भेजने जैसे तरीकों का इस्तेमाल कर सकते हैं।

मामले में आरोपों की गंभीर और चिंताजनक प्रकृति को देखते हुए अदालत ने आरोपी की जमानत याचिका में कोई आधार नहीं पाया और उसे खारिज कर दिया।

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