Home Punjab  दो दिन की मूसलाधार बारिश से रोपड़ के शहर जलमग्न,श्री आनंदपुर साहिब में दो फीट तक पानी

 दो दिन की मूसलाधार बारिश से रोपड़ के शहर जलमग्न,श्री आनंदपुर साहिब में दो फीट तक पानी

रोपड़/श्री आनंदपुर साहिब । राजवीर दीक्षित

(Ropar city inundated after two days of torrential rain; water levels reach up to two feet in Sri Anandpur Sahib)रोपड़ जिले में लगातार दो दिनों से हो रही भारी बारिश ने कई शहरी इलाकों को जलमग्न कर दिया है। इस बारिश ने पंजाब के शहरों की बढ़ती मौसम संबंधी संवेदनशीलता और कमजोर शहरी ड्रेनेज व्यवस्था की पोल खोल दी है। सड़कों पर पानी भर गया, घरों और दुकानों में बारिश का पानी घुस गया और कई बरसाती नाले उफान पर आ गए।
सबसे ज्यादा प्रभावित शहरों में श्री आनंदपुर साहिब भी शामिल रहा। शहर की लगभग सभी प्रमुख सड़कें, यहां तक कि तख्त श्री केसगढ़ साहिब को जाने वाली मुख्य सड़क भी करीब दो फीट पानी में डूबी रही। इसके चलते छोटे वाहनों की आवाजाही पूरी तरह प्रभावित हुई और स्थानीय लोगों के साथ-साथ गुरुद्वारा साहिब में आने वाले श्रद्धालुओं को भी परेशानी का सामना करना पड़ा।
कई इलाकों के लोगों ने बताया कि बारिश का पानी उनके घरों और दुकानों में घुस गया, जिससे घरेलू सामान को नुकसान पहुंचा और कारोबार भी प्रभावित हुआ। कई स्थानों पर घंटों तक जलभराव बना रहा, क्योंकि अचानक हुई तेज बारिश के सामने ड्रेनेज सिस्टम पूरी तरह बेबस नजर आया।
इसी बीच क्षेत्र के बरसाती नालों और नदियों का जलस्तर भी तेजी से बढ़ गया।श्री आनंदपुर साहिब से होकर गुजरने वाली चरण गंगा नदी पूरे उफान पर दिखाई दी। नदी का बढ़ा हुआ पानी शहर में बने रेलवे पुल तक पहुंच गया। हालांकि किसी बड़े नुकसान की सूचना नहीं मिली, लेकिन नदी किनारे रहने वाले लोगों में बढ़ते जलस्तर को लेकर चिंता जरूर बढ़ गई।
वैज्ञानिकों के मुताबिक, ऐसे जलभराव और बाढ़ की घटनाओं के पीछे बदलते बारिश के पैटर्न और प्राकृतिक जल निकासी मार्गों की दशकों से हो रही अनदेखी दोनों बड़ी वजहें हैं।
पर्यावरण वैज्ञानिक, भू-विज्ञानी और श्री देव सुमन उत्तराखंड विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर ए.के. महाजन के अनुसार अल नीनो के प्रभाव के चलते बारिश वाले बादलों का तेजी से निर्माण हो रहा है, जिसके कारण उत्तरी भारत में कम समय के भीतर बेहद तेज बारिश हो रही है। उनका कहना था कि थोड़े समय में होने वाली इतनी अधिक बारिश शहरों की ड्रेनेज व्यवस्था पर भारी दबाव डालती है और अचानक बाढ़ जैसे हालात पैदा कर देती है।
हालांकि प्रोफेसर महाजन ने साफ किया कि बार-बार होने वाले जलभराव के लिए सिर्फ जलवायु परिवर्तन को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता।
उन्होंने कहा कि ज्यादातर शहरों में पुराने प्राकृतिक जल निकासी मार्ग या तो अतिक्रमण की चपेट में आ चुके हैं या उनका स्वरूप बदल दिया गया है। जिन प्राकृतिक नालों से कभी बारिश का पानी आसानी से निकल जाता था, वे अब सड़कों, कॉलोनियों और व्यावसायिक परिसरों के नीचे दब चुके हैं। मोहाली जैसे शहरों में ऐसे इलाकों पर भी निर्माण हो चुका है, जहां कभी बरसाती नाले या प्राकृतिक जल निकासी चैनल हुआ करते थे।
उन्होंने आगे कहा कि कई राज्यों में शहरी नियोजन के दौरान प्राकृतिक ड्रेनेज नेटवर्क को बचाने की जरूरत को नजरअंदाज किया गया। यही वजह है कि भारी बारिश के दौरान शहरों में जलभराव का खतरा लगातार बढ़ रहा है।
पंजाब के स्थानीय निकाय एवं शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने भी पंजाब के शहरों में जलभराव के लिए कम समय में हुई असामान्य रूप से भारी बारिश को बड़ी वजह बताया। उन्होंने कहा कि हालांकि उनके पास इसका समर्थन करने वाला वैज्ञानिक डेटा नहीं है, लेकिन ऐसा प्रतीत होता है कि कम समय में अत्यधिक बारिश होने के कारण पंजाब के कई शहरों में बड़े पैमाने पर जलभराव हो रहा है।
बैंस ने यह भी कहा कि हाल की बारिश के दौरान चंडीगढ़, जिसे क्षेत्र की बेहतर नियोजित ड्रेनेज व्यवस्था वाले शहरों में माना जाता है, वहां भी काफी जलभराव देखने को मिला।
उन्होंने बताया कि मानसून शुरू होने से पहले स्थानीय निकाय विभाग ने राज्यभर में सभी शहरी स्थानीय निकायों के नालों की सफाई के लिए अभियान चलाया था।
वहीं, ड्रेनेज विभाग के सूत्रों के मुताबिक, स्टॉर्म वॉटर ड्रेनों पर बड़े पैमाने पर हुए अतिक्रमण और नालों को ढकने की बढ़ती प्रवृत्ति ने उनकी पानी ले जाने की क्षमता को काफी कम कर दिया है।
सूत्रों का कहना है कि ढके हुए नालों की नियमित रूप से सफाई और गाद निकालना मुश्किल हो जाता है। इसके कारण समय के साथ प्लास्टिक और अन्य कचरा जमा होता रहता है। जब अचानक तेज बारिश होती है तो यही कचरा पानी के बहाव को रोक देता है और देखते ही देखते सड़कें और आसपास के रिहायशी इलाके पानी में डूबने लगते हैं।

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