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हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: नोटरी नहीं करा सकता शादी, ₹2 लाख जमा कराने का आदेश

चंडीगढ़ । राजवीर दीक्षित

(Major High Court ruling: Notary cannot solemnize marriage; order to deposit ₹2 lakh) राजस्थान हाईकोर्ट ने नोटरी के अधिकारों को लेकर महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया है कि नोटरी को विवाह कराने, विवाह प्रमाणपत्र जारी करने या विवाह-विच्छेद से संबंधित दस्तावेज निष्पादित करने का कानूनी अधिकार नहीं है।

मामला एक नोटरी द्वारा बिना वैधानिक अधिकार के विवाह से संबंधित दस्तावेजों को नोटरीकृत किए जाने से जुड़ा था। मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट की खंडपीठ ने कार्रवाई समाप्त करते हुए नोटरी को दोबारा काम शुरू करने से पहले रजिस्ट्रेशन में ₹2 लाख जमा कराने का निर्देश दिया।

कोर्ट ने क्या कहा?

अदालत ने टिप्पणी की कि गलती दोहराना पाप है, हालांकि नोटरी को अपनी गलती सुधारने का अवसर दिया गया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि नोटरी को अपने निर्धारित कानूनी अधिकारों की सीमा में रहकर ही काम करना होगा।

फैसले में यह भी साफ किया गया कि विवाह या विवाह-विच्छेद से संबंधित दस्तावेजों का नोटरीकरण करना नोटरी के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता। बिना अधिकार ऐसे दस्तावेज तैयार करना गंभीर मामला हो सकता है।

कार्यस्थल पर लगाना होगा सूचना बोर्ड

कोर्ट ने नोटरी को अपने कार्यस्थल पर स्पष्ट सूचना बोर्ड लगाने का भी निर्देश दिया, ताकि लोगों को यह जानकारी रहे कि नोटरी किन कानूनी कार्यों के लिए अधिकृत है और किन मामलों में वह दस्तावेज तैयार या प्रमाणित नहीं कर सकता।

लोगों के लिए जरूरी कानूनी जानकारी

सिर्फ नोटरी के सामने दस्तावेज तैयार या हस्ताक्षर करवा लेने से विवाह कानूनी रूप से संपन्न नहीं माना जाता। विवाह को वैध बनाने के लिए संबंधित कानून और निर्धारित वैधानिक प्रक्रिया का पालन करना जरूरी है।rshal

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