Home Punjab पंजाब में बिजली संकट गहराया, 3 दिन का कोयला स्टॉक!

पंजाब में बिजली संकट गहराया, 3 दिन का कोयला स्टॉक!

चंडीगढ़। राजवीर दीक्षित 

(Power crisis deepens in Punjab; coal stocks sufficient for only 3 days!) पंजाब में बिजली संकट को लेकर सरकार और केंद्र के बीच टकराव बढ़ गया है। राज्य सरकार का दावा है कि निजी थर्मल प्लांटों में अब सिर्फ तीन दिन का कोयला स्टॉक बचा है। अगर समय पर कोयले की नई सप्लाई नहीं पहुंची तो थर्मल प्लांटों में उत्पादन प्रभावित हो सकता है और आने वाले दिनों में बिजली कटौती बढ़ने की आशंका है।

वहीं, केंद्र सरकार ने पंजाब में कोयले की कमी के दावे को खारिज कर दिया है। कोयला मंत्रालय के मुताबिक 4 सितंबर तक PSPCL के अपने थर्मल प्लांटों में जरूरत के मुकाबले 117 प्रतिशत कोयला स्टॉक मौजूद था। केंद्र ने राज्य में कम बिजली उत्पादन की वजह कोयले की कमी के बजाय प्लांटों के कम PLF यानी क्षमता से कम उत्पादन को बताया है।

इस तरह बिजली संकट को लेकर पंजाब सरकार और केंद्र के आंकड़े आमने-सामने हैं।

पंजाब सरकार का दावा- प्राइवेट प्लांटों में सिर्फ 3 दिन का कोयला

पंजाब में बिजली की मांग करीब 15,900 मेगावाट तक पहुंच गई है। इसके मुकाबले राज्य का अपना उत्पादन लगभग 4,862 मेगावाट है। करीब 11,100 मेगावाट बिजली केंद्रीय पूल और बाहरी स्रोतों से खरीदनी पड़ रही है।

राज्य के पांच प्रमुख थर्मल प्लांटों की कुल स्थापित क्षमता करीब 5,680 मेगावाट है, लेकिन फिलहाल लगभग 3,800 मेगावाट उत्पादन ही हो रहा है।

राज्य सरकार के मुताबिक निजी थर्मल प्लांटों में करीब तीन दिन और सरकारी प्लांटों में 8 से 10 दिन का कोयला स्टॉक बचा है। ऐसे में अगर कोयले की रैक समय पर नहीं पहुंची तो उत्पादन और कम हो सकता है।

केंद्र बोला- कोयले की कमी नहीं

कोयला मंत्रालय ने पंजाब के दावे पर अलग तस्वीर पेश की है। मंत्रालय के अनुसार PSPCL के तीन प्रमुख थर्मल प्लांटों—गुरु हरगोबिंद थर्मल प्लांट लहरा मोहब्बत, गोइंदवाल साहिब और रोपड़—की संयुक्त क्षमता 2,300 मेगावाट है।

4 सितंबर तक इन प्लांटों में कोयले का स्टॉक निर्धारित जरूरत का करीब 117 प्रतिशत था। इसके बावजूद अगस्त में इन प्लांटों का औसत PLF करीब 42 प्रतिशत रहा।

केंद्र का तर्क है कि यदि प्लांटों में पर्याप्त कोयला मौजूद था और उत्पादन क्षमता से काफी कम रहा, तो कम जनरेशन की वजह सिर्फ कोयले की कमी नहीं मानी जा सकती।

नाभा पावर ने 93% PLF पर किया उत्पादन

केंद्र ने अपने पक्ष में नाभा पावर लिमिटेड (NPL) का उदाहरण भी दिया है। मंत्रालय के मुताबिक अगस्त में NPL ने करीब 93 प्रतिशत PLF पर उत्पादन किया।

केंद्र के अनुसार NPL और तलवंडी साबो पावर लिमिटेड (TSPL) को पचवाड़ा सेंट्रल कोल माइन के वार्षिक उत्पादन का 50 प्रतिशत तक इस्तेमाल करने की अनुमति है।

इसके अलावा कोल इंडिया लिमिटेड की ओर से भी दोनों निजी प्लांटों के लिए कोयले की पेशकश की गई थी। केंद्र का कहना है कि उपलब्ध कोयले की समय पर बुकिंग और उठान करना भी संबंधित प्लांटों की जिम्मेदारी है।

दो यूनिट अभी भी बंद

इस बीच पंजाब के सरकारी थर्मल प्लांटों की कुछ यूनिटें अभी भी बंद हैं। फिलहाल लहरा मोहब्बत की एक यूनिट और रोपड़ की यूनिट नंबर-6 बंद बताई जा रही है।

तलवंडी साबो में उत्पादन अपेक्षाकृत बेहतर है, जबकि अन्य प्लांटों में क्षमता के मुकाबले करीब आधा उत्पादन हो रहा है।

शाम के वक्त बढ़ सकता है संकट

दिन के समय सोलर पावर से पंजाब को कुछ राहत मिल रही है, लेकिन शाम होते ही सौर ऊर्जा उत्पादन तेजी से घटकर लगभग शून्य हो जाता है। ऐसे में पीक आवर्स के दौरान थर्मल प्लांटों से कम उत्पादन होने पर ग्रिड पर दबाव बढ़ जाता है।

अब सबसे बड़ा सवाल अगले तीन दिनों में कोयले की सप्लाई को लेकर है। अगर निजी थर्मल प्लांटों को समय पर कोयला नहीं मिला और उत्पादन प्रभावित हुआ, तो पंजाब की अपनी बिजली उपलब्धता और घट सकती है। इसका सीधा असर शाम के पीक घंटों में बिजली कटौती पर पड़ने की आशंका है।

Translate »
error: Content is protected !!