thetargetnews.in ब्यूरो: पंजाब के किसानों और मधुमक्खी पालकों के लिए एक नई उम्मीद की किरण जगी है। राज्य में अक्सर शहद की बंपर पैदावार के बाद बाजार में मांग कम होने से किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ता था, लेकिन अब इस ‘मिठास’ को एक नया और मुनाफे वाला रास्ता मिल गया है। अब बिना बिके शहद को वाइन में बदलकर उसे अंतरराष्ट्रीय बाजार में ऊंचे दामों पर बेचा जा सकेगा।
शहद से वाइन बनाने की अनूठी पहल
पंजाब के कृषि विशेषज्ञों और वैज्ञानिकों ने मिलकर एक ऐसी तकनीक पर काम किया है, जिससे शहद के फर्मेंटेशन (किण्वन) के जरिए उच्च गुणवत्ता वाली वाइन तैयार की जा रही है। यह न केवल किसानों की आय बढ़ाने का जरिया है, बल्कि कृषि आधारित उद्योगों के लिए भी एक बड़ा अवसर है।
कैसे तैयार होती है यह खास वाइन?
- बिना बिके हुए शुद्ध शहद का चयन किया जाता है।
- विशेष तापमान पर इसे फर्मेंटेशन प्रक्रिया से गुजारा जाता है।
- इसमें प्राकृतिक जड़ी-बूटियों और फलों के अर्क का मिश्रण किया जाता है।
- इसे लंबे समय तक स्टोर किया जा सकता है, जिससे इसकी कीमत बढ़ जाती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि शहद से बनी वाइन स्वास्थ्य के लिए भी काफी फायदेमंद मानी जाती है क्योंकि इसमें एंटीऑक्सीडेंट्स की भरपूर मात्रा होती है। यह पारंपरिक अंगूर की वाइन का एक बेहतरीन और प्राकृतिक विकल्प है।
किसानों की आय में होगा इजाफा
राज्य के मधुमक्खी पालन केंद्रों पर अब इस नई तकनीक को अपनाने की तैयारी चल रही है। इससे उन किसानों को सबसे ज्यादा फायदा होगा जो शहद का भंडारण तो कर लेते हैं, लेकिन सही खरीदार न मिलने के कारण उसे औने-पौने दामों पर बेचने को मजबूर होते हैं। अब इस शहद को वाइन में बदलकर वे सीधे प्रीमियम मार्केट में अपनी पहुंच बना सकते हैं।
भविष्य की राह
सरकार भी इस पहल को बढ़ावा देने के लिए सूक्ष्म और लघु उद्योगों (MSME) के तहत सब्सिडी देने पर विचार कर रही है। यदि यह प्रयोग पंजाब में सफल रहता है, तो यह राज्य की ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए एक गेम-चेंजर साबित हो सकता है।



















