thetargetnews.in ब्यूरो: पंजाब कृषि विश्वविद्यालय (PAU) ने राज्य में तेजी से कम होती पक्षियों की आबादी को बचाने के लिए एक सराहनीय और वैज्ञानिक पहल शुरू की है। लुधियाना स्थित इस संस्थान ने ‘होम ट्वीट होम’ परियोजना के तहत पक्षियों के लिए विशेष ‘हाई-राइज’ घोंसले तैयार किए हैं, जो कंक्रीट के जंगलों में सिमटते प्राकृतिक आवासों की कमी को पूरा करेंगे।
क्यों पड़ी इन कृत्रिम घोंसलों की जरूरत?
पिछले कुछ दशकों में पंजाब में बढ़ते शहरीकरण और कृषि पद्धतियों में बदलाव के कारण गौरैया, उल्लू और अन्य छोटे पक्षियों के प्राकृतिक बसेरे खत्म हो गए हैं। पेड़ों की कटाई और आधुनिक घरों की बनावट ने पक्षियों के लिए घोंसले बनाने की जगह ही नहीं छोड़ी है। PAU के विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते इन पक्षियों को सुरक्षित आश्रय नहीं दिया गया, तो पारिस्थितिक तंत्र का संतुलन बिगड़ सकता है।
वैज्ञानिक तकनीक से लैस हैं ये घोंसले
PAU द्वारा विकसित ये घोंसले न केवल सुरक्षित हैं, बल्कि पक्षियों की विभिन्न प्रजातियों की जरूरतों के हिसाब से डिजाइन किए गए हैं। इन घोंसलों की मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित हैं:
- तापमान नियंत्रण: घोंसलों को इस तरह बनाया गया है कि वे भीषण गर्मी और कड़ाके की ठंड में भी अंदर का तापमान स्थिर रखते हैं।
- सुरक्षा: इन ढांचों को बिल्लियों और अन्य शिकारी जानवरों से सुरक्षित रखने के लिए विशेष ऊंचाई पर लगाया जा रहा है।
- सामग्री: घोंसले बनाने में पूरी तरह से इको-फ्रेंडली और स्थानीय सामग्री का उपयोग किया गया है।
विशेषज्ञों का कहना है कि पक्षियों की घटती संख्या न केवल जैव विविधता के लिए खतरा है, बल्कि यह फसलों के लिए भी नुकसानदेह है, क्योंकि कई पक्षी प्राकृतिक रूप से कीटों को नियंत्रित करने का काम करते हैं।
भविष्य की राह
PAU की इस पहल का उद्देश्य न केवल पक्षियों को बचाना है, बल्कि आम लोगों को भी अपने घरों की छतों और बगीचों में इन घोंसलों को लगाने के लिए प्रोत्साहित करना है। विश्वविद्यालय प्रशासन का मानना है कि यदि हर घर में एक घोंसला भी लगाया जाए, तो पंजाब के आसमान में चहचहाहट फिर से लौट सकती है। यह परियोजना पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक मील का पत्थर साबित हो सकती है।



















