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UPI और RuPay Debit Card से भुगतान पर नहीं लगेगा चार्ज, सरकार ने जारी की अधिसूचना

नई दिल्ली। राजवीर दीक्षित

(No charges on payments made via UPI and RuPay debit cards; government issues notification) वित्त मंत्रालय ने सोमवार को स्पष्ट कर दिया है कि ₹2,000 तक के UPI लेनदेन और RuPay Debit Card से किए जाने वाले भुगतान पर बैंक या पेमेंट सिस्टम प्रोवाइडर किसी भी तरह का शुल्क नहीं लगा सकेंगे। सरकार ने इस संबंध में अधिसूचना जारी करते हुए प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से चार्ज वसूलने पर रोक लगाई है।

सरकारी अधिसूचना के मुताबिक, निर्धारित इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से भुगतान करने या प्राप्त करने वाले व्यक्ति से किसी बैंक या सिस्टम प्रोवाइडर द्वारा अतिरिक्त शुल्क नहीं लिया जाएगा। इसमें RuPay Debit Card और ₹2,000 तक के UPI भुगतान शामिल हैं

UPI में छोटे लेनदेन की बड़ी हिस्सेदारी

वित्त वर्ष 2025-26 में Person-to-Merchant यानी व्यक्ति से व्यापारी को किए गए UPI भुगतानों में केवल 4 प्रतिशत लेनदेन ₹2,000 से अधिक राशि के थे। हालांकि, कुल मूल्य के लिहाज से इन्हीं बड़े लेनदेन की हिस्सेदारी करीब दो-तिहाई रही।

इसी अवधि में देशभर में 24,000 करोड़ से ज्यादा UPI ट्रांजैक्शन हुए, जिनकी कुल राशि लगभग ₹314 लाख करोड़ रही।

कानून में संशोधन के बाद उठे थे शुल्क को लेकर सवाल

सरकार का यह स्पष्टीकरण Taxation and Other Laws (Amendment) Bill, 2026 के बाद आया है। पिछले महीने संसद से पारित इस कानून के जरिए Payment and Settlement Systems Act, 2007 की धारा 10A में बदलाव किया गया था।

इस संशोधन के बाद बड़े कारोबारियों द्वारा किए जाने वाले UPI और RuPay Debit Card भुगतानों पर Merchant Discount Rate यानी MDR लागू होने की संभावना बनी थी। इससे Amazon और Flipkart जैसे बड़े व्यापारिक प्रतिष्ठानों पर शुल्क लगाए जाने का रास्ता खुल सकता था।

आम लोगों के UPI भुगतान पर शुल्क नहीं

वित्त मंत्रालय पहले भी स्पष्ट कर चुका था कि कानून में बदलाव को सभी UPI भुगतानों पर शुल्क लगाने के फैसले के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए। सरकार के मुताबिक इसका उद्देश्य डिजिटल भुगतान व्यवस्था को लंबे समय तक मजबूत, सुरक्षित और तकनीकी रूप से सक्षम बनाए रखना है।

व्यक्ति से व्यक्ति यानी P2P भुगतान और छोटे मूल्य वाले लेनदेन को शुल्क से बाहर रखने की बात अब अधिसूचना के जरिए स्पष्ट कर दी गई है।

UPI सिस्टम की लागत को लेकर चिंता

बैंक और पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर लंबे समय से डिजिटल भुगतान ढांचे की बढ़ती लागत का मुद्दा उठाते रहे हैं। वित्त संबंधी स्थायी समिति ने मार्च में अपनी रिपोर्ट में MDR की अनुपस्थिति को UPI इकोसिस्टम की वित्तीय स्थिरता के लिए चुनौती बताया था।

आमतौर पर Debit और Credit Card भुगतानों पर 1 से 3 प्रतिशत तक MDR लगाया जाता है। यह राशि लेनदेन की प्रोसेसिंग, सेटलमेंट और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़ी लागत को पूरा करने में मदद करती है।

2020 से UPI पर नहीं लग रहा MDR

जनवरी 2020 से देश में UPI और RuPay Debit Card भुगतानों पर MDR समाप्त है। इसका उद्देश्य डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा देना था।

इसके बदले सरकार छोटे व्यापारियों को ₹2,000 तक के RuPay Debit Card और कम मूल्य वाले BHIM-UPI P2M लेनदेन के लिए प्रोत्साहन देती है। इस योजना के तहत प्रोत्साहन लेनदेन मूल्य के अधिकतम 0.15 प्रतिशत तक सीमित है।

सरकार ने दी करोड़ों की सब्सिडी

वित्त वर्ष 2026-27 के बजट में इस योजना के लिए मौजूदा वित्त वर्ष में लगभग ₹2,000 करोड़ की सब्सिडी का अनुमान लगाया गया है।

वित्त वर्ष 2025-26 में सरकार ने इस मद में ₹2,196.21 करोड़ की सब्सिडी दी थी, जबकि 2024-25 में यह राशि ₹1,922.77 करोड़ रही थी।

पेमेंट इंडस्ट्री पर ₹20,700 करोड़ की सालाना लागत

वित्तीय सेवा विभाग ने इस साल वित्त संबंधी स्थायी समिति को बताया था कि Person-to-Merchant यानी P2M लेनदेन से जुड़ी पेमेंट इंडस्ट्री पर हर वर्ष लगभग ₹20,700 करोड़ की लागत आती है।

इसी वजह से बड़े मूल्य वाले UPI भुगतानों के लिए MDR लागू करने की संभावना पर चर्चा तेज हुई है। रिपोर्ट्स के अनुसार, उच्च मूल्य वाले P2M UPI लेनदेन पर करीब 0.4 प्रतिशत MDR लगाया जा सकता है।

फिलहाल सरकार की नई अधिसूचना से यह साफ है कि ₹2,000 तक के UPI भुगतान और RuPay Debit Card लेनदेन पर आम यूजर्स से कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा।

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