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मणिपुर राहत शिविरों में 31 मौतों पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, राज्य सरकार से मांगा जवाब

मणिपुर राहत शिविरों में 31 मौतों पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, राज्य सरकार से मांगा जवाब

टारगेट न्यूज़ ब्यूरो: मणिपुर के राहत शिविरों में 31 लोगों की अप्राकृतिक मौतों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने गंभीर चिंता जताई है। शीर्ष अदालत ने राज्य सरकार को फटकार लगाते हुए इन मौतों के कारणों और शिविरों में दी जा रही सुविधाओं पर विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ ने स्पष्ट किया है कि मानवीय आधार पर राहत शिविरों में रहने वाले लोगों की सुरक्षा और स्वास्थ्य सुनिश्चित करना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।

न्यायालय की कड़ी टिप्पणी

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने राज्य प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि राहत शिविरों में बुनियादी सुविधाओं का अभाव और मौतों का आंकड़ा चिंताजनक है। अदालत ने कहा कि विस्थापित लोगों को सम्मानजनक जीवन जीने का अधिकार है और सरकार इस जिम्मेदारी से पीछे नहीं हट सकती।

न्यायालय ने कहा, ‘राहत शिविरों में 31 लोगों की अप्राकृतिक मौतें कोई सामान्य घटना नहीं है। हमें यह जानना है कि इन मौतों के पीछे की वास्तविक स्थिति क्या है और क्या वहां चिकित्सा सहायता उपलब्ध थी।’

प्रमुख बिंदु

  • मणिपुर राहत शिविरों में स्वास्थ्य सेवाओं की कमी पर कोर्ट ने जताई नाराजगी।
  • राज्य सरकार को विस्थापितों के लिए भोजन, पानी और दवाइयों की उपलब्धता सुनिश्चित करने का निर्देश।
  • अदालत ने राज्य के मुख्य सचिव को व्यक्तिगत रूप से स्थिति की निगरानी करने को कहा।
  • राहत शिविरों में स्वच्छता और पोषण संबंधी मानकों की जांच के लिए रिपोर्ट मांगी गई।

आगे की राह

सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में अगली सुनवाई के लिए समय सीमा तय करते हुए राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि वह शिविरों में रह रहे लोगों के पुनर्वास और उनकी सुरक्षा के लिए उठाए गए कदमों का पूरा ब्यौरा पेश करे। यह मामला अब मणिपुर में चल रहे जातीय संघर्ष के पीड़ितों के मानवाधिकारों के संरक्षण के नजरिए से बेहद महत्वपूर्ण हो गया है।

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