कुल्लू । राजवीर दीक्षित
(Cloudbursts disrupt normal life in Himachal; access roads to several villages cut off) सुचैहण पंचायत के नूहड़ा वाटरफॉल क्षेत्र में शुक्रवार को बादल फटने के बाद हालात बिगड़ गए। अचानक तेज बारिश हुई और कुछ ही देर में बाढ़ का पानी मलबे के साथ तेज रफ्तार से नीचे की ओर आने लगा।
इस सैलाब की चपेट में आकर करीब छह पुलियाएं बह गईं। गांवों को जोड़ने वाले पैदल रास्ते टूट गए और लोगों की आवाजाही प्रभावित हो गई।
मुसीबत यहीं खत्म नहीं हुई। बाढ़ के पानी ने कई पेयजल योजनाओं की पाइपलाइन को भी क्षतिग्रस्त कर दिया। पाइपलाइन टूटने के बाद अब ग्रामीणों को आने वाले दिनों में पानी की समस्या का सामना करना पड़ सकता है।स्थानीय लोगों के मुताबिक, पानी अचानक इतनी तेजी से आया कि किसी को कुछ समझने तक का मौका नहीं मिला। जहां कुछ देर पहले सामान्य आवाजाही थी, वहीं देखते ही देखते पानी और मलबे का तेज बहाव नजर आने लगा।अब चुनौती सिर्फ नुकसान का जायजा लेने की नहीं, बल्कि टूटे रास्तों और पानी की व्यवस्था को जल्द से जल्द बहाल करने की भी है।
मलबे के सैलाब ने बिगाड़ी तस्वीर, गांवों की राह हुई मुश्किल
बादल फटने के बाद क्षेत्र में पानी और मलबे ने जमकर कहर बरपाया। जगह-जगह संपर्क मार्ग प्रभावित होने के कारण ग्रामीणों की आवाजाही मुश्किल हो गई है। कई छोटे रास्ते और पुलियाएं तेज बहाव की चपेट में आकर क्षतिग्रस्त हो गईं।
नूहड़ा वाटरफॉल भी इस प्राकृतिक आपदा से अछूता नहीं रहा। तेज पानी अपने साथ भारी मात्रा में मलबा बहाकर लाया, जिसके कारण वाटरफॉल का प्राकृतिक स्वरूप बदल गया और आसपास का क्षेत्र मलबे से भर गया।
सबसे ज्यादा परेशानी उन ग्रामीणों को हो रही है, जो पैदल रास्तों और छोटी पुलियाओं के जरिए आसपास के गांवों तक पहुंचते हैं। स्थानीय स्तर पर अब प्रशासन से जल्द मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लेने की मांग उठ रही है।
बादल फटने से तबाही, पुलियों-रास्तों के साथ पेयजल योजनाएं भी प्रभावित
बादल फटने की घटना से क्षेत्र में कई पुलियाओं, पैदल रास्तों और पेयजल योजनाओं को भारी नुकसान पहुंचा है। इसके चलते ग्रामीणों के सामने आवाजाही के साथ-साथ पेयजल की समस्या भी खड़ी हो गई है। प्रधान ने प्रशासन से प्रभावित क्षेत्रों में तुरंत टीमें भेजकर नुकसान का वास्तविक आकलन करवाने की मांग की है।
उन्होंने कहा कि क्षतिग्रस्त पुलियाओं और रास्तों की जल्द मरम्मत के साथ पेयजल योजनाओं को भी प्राथमिकता के आधार पर बहाल किया जाए। ग्रामीणों को राहत देने के लिए मरम्मत कार्य में किसी तरह की देरी नहीं होनी चाहिए।



















