ऊना। राजवीर दीक्षित
(Entrepreneurship Promotion Conference at B.Ed. College; Emphasis on Self-Reliance) स्वदेशी जागरण मंच के तत्वावधान में आज बीएड कॉलेज समूरकलां में उद्यमिता प्रोत्साहन सम्मेलन का आयोजन किया गया। सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य युवाओं में उद्यमिता की भावना को बढ़ावा देना, उन्हें स्वरोजगार के लिए प्रेरित करना और स्वदेशी, आत्मनिर्भरता एवं स्वावलंबन की दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित करना रहा।
कार्यक्रम में विद्यार्थियों और उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए मुख्य वक्ता जितेंद्र बाली ने उद्यमिता और स्वरोजगार के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से विचार रखे। उन्होंने कहा कि आज के समय में युवाओं के सामने रोजगार तलाशने के साथ-साथ रोजगार देने वाला बनने का भी अवसर है। स्थानीय संसाधनों, अपनी प्रतिभा और कौशल का बेहतर इस्तेमाल कर युवा छोटे स्तर से अपना व्यवसाय शुरू कर सकते हैं और धीरे-धीरे उसे बड़े उद्यम के रूप में विकसित कर सकते हैं।
उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भरता केवल आर्थिक मजबूती का माध्यम नहीं, बल्कि आत्मविश्वास और स्वाभिमान से जुड़ा विषय भी है। यदि युवा अपनी क्षमताओं को पहचानकर स्वरोजगार की दिशा में कदम बढ़ाते हैं तो इससे उनके साथ-साथ स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।
स्वदेशी को बढ़ावा देने पर जोर
स्वदेशी जागरण मंच के जिला पूर्णकालिक सत्यदेव शर्मा ने अभियान की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए स्वदेशी उत्पादों, स्थानीय उद्यमों और देश में तैयार वस्तुओं को प्रोत्साहित करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि स्थानीय स्तर पर तैयार होने वाले उत्पादों और सेवाओं को बढ़ावा मिलने से छोटे कारोबारियों, कारीगरों और युवाओं के लिए नए अवसर पैदा हो सकते हैं।
उन्होंने कहा कि स्वदेशी का विचार स्थानीय प्रतिभा, स्थानीय संसाधनों और स्थानीय उत्पादन को मजबूत करने से जुड़ा है। इसके माध्यम से समाज को आर्थिक रूप से अधिक सक्षम और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में काम किया जा सकता है।
युवाओं में उद्यमिता की सोच विकसित करने की जरूरत
स्वदेशी जागरण मंच के जिला प्रचार प्रमुख पंकज सहोड़ ने उद्यमिता प्रोत्साहन को लेकर अपने विचार रखे। उन्होंने युवाओं से पारंपरिक रोजगार के विकल्पों के साथ-साथ नए क्षेत्रों में स्वरोजगार की संभावनाएं तलाशने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि बदलते समय में तकनीक और नए बाजारों ने छोटे उद्यमों के लिए भी कई संभावनाएं पैदा की हैं। युवाओं को अपने कौशल को विकसित करते हुए स्थानीय जरूरतों के अनुरूप नए व्यवसायिक मॉडल तैयार करने चाहिए।
शिक्षा के साथ कौशल और स्वावलंबन जरूरी
कॉलेज प्राचार्य हंसराज ने सम्मेलन के आयोजन की सराहना करते हुए कहा कि विद्यार्थियों को शिक्षा के साथ-साथ व्यावहारिक कौशल और आत्मनिर्भर बनने की सोच भी विकसित करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि ऐसे कार्यक्रम युवाओं को रोजगार के पारंपरिक विकल्पों से आगे बढ़कर स्वरोजगार और उद्यमिता की संभावनाओं को समझने का अवसर देते हैं।
उन्होंने कहा कि किसी भी क्षेत्र का विकास तभी मजबूत हो सकता है, जब वहां के युवा अपनी क्षमताओं का इस्तेमाल कर नए अवसर पैदा करें। स्थानीय स्तर पर छोटे-छोटे उद्यम खड़े होने से रोजगार के साथ आर्थिक गतिविधियों को भी गति मिलती है।
आत्मनिर्भर समाज की दिशा में पहल
सम्मेलन में स्वदेशी अपनाने, स्थानीय उत्पादन को बढ़ावा देने, युवाओं को स्वरोजगार के लिए तैयार करने और आर्थिक रूप से स्वावलंबी बनने पर विशेष जोर दिया गया। वक्ताओं ने कहा कि आत्मनिर्भरता की शुरुआत व्यक्तिगत स्तर से होकर परिवार, समाज और देश की अर्थव्यवस्था तक पहुंचती है।
कार्यक्रम में विद्यार्थियों को यह संदेश दिया गया कि नौकरी की तलाश करने के साथ रोजगार सृजन की सोच भी विकसित करनी होगी। अपनी प्रतिभा, कौशल और स्थानीय संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल से युवा न केवल अपने भविष्य को मजबूत कर सकते हैं, बल्कि समाज और देश की आर्थिक मजबूती में भी योगदान दे सकते हैं।
सम्मेलन का मूल संदेश यही रहा कि स्वदेशी केवल उत्पाद खरीदने की अवधारणा नहीं, बल्कि स्थानीय क्षमता पर विश्वास, स्वरोजगार को बढ़ावा और आत्मनिर्भर भारत की दिशा में सामूहिक प्रयास का माध्यम है। इस मौके पर कॉलेज स्टाफ की ओर से बक्शो देवी, भारती देवी, दीक्षा शर्मा, सविता,वीरेंद्र कुमार व रविकांत भी उपस्थित रहे।



















