टारगेट न्यूज़ ब्यूरो: दिल्ली पुलिस की हेड कांस्टेबल सीमा ढाका ने अपनी कर्तव्यनिष्ठा और साहस की एक ऐसी मिसाल पेश की है, जिसने न केवल विभाग का मान बढ़ाया, बल्कि दर्जनों परिवारों की खुशियां भी लौटा दीं। कोरोना महामारी के कठिन दौर में, जब पूरी दुनिया घरों में कैद थी, सीमा ढाका ने चार राज्यों की खाक छानते हुए 76 लापता बच्चों को ढूंढ निकाला और उन्हें उनके माता-पिता से मिलवाया।
संकल्प और साहस की कहानी
साल 2020 में दिल्ली पुलिस ने लापता बच्चों की बरामदगी के लिए एक विशेष प्रोत्साहन योजना शुरू की थी। इस चुनौती को सीमा ढाका ने एक मिशन के रूप में लिया। उन्होंने अपनी जान की परवाह किए बिना और कोविड-19 के जोखिमों को नजरअंदाज करते हुए देश के विभिन्न हिस्सों में तलाशी अभियान चलाया। उनकी मेहनत का ही नतीजा था कि वे 76 बच्चों को सुरक्षित उनके घर तक पहुंचाने में सफल रहीं।
ऐतिहासिक पदोन्नति का सम्मान
सीमा ढाका के इस असाधारण कार्य के लिए उन्हें दिल्ली पुलिस द्वारा ‘आउट ऑफ टर्न’ प्रमोशन दिया गया। यह सम्मान न केवल उनकी मेहनत का फल था, बल्कि उन सभी पुलिसकर्मियों के लिए एक प्रेरणा भी है जो समाज की सेवा में दिन-रात जुटे रहते हैं।
सीमा ढाका कहती हैं, ‘हमें जोखिम का पूरा अंदाजा था, लेकिन उन बच्चों की आंखों में छिपी उम्मीद और उनके माता-पिता का दर्द हमें रुकने नहीं दे रहा था। यह सिर्फ नौकरी नहीं, बल्कि एक मानवीय जिम्मेदारी थी।’
प्रमुख उपलब्धियां
- चार राज्यों में फैले नेटवर्क को खंगालकर 76 लापता बच्चों को बरामद किया।
- महामारी के दौरान कठिन परिस्थितियों में भी अपने मिशन को जारी रखा।
- दिल्ली पुलिस में असाधारण कार्य के लिए ऐतिहासिक पदोन्नति प्राप्त की।
- सैकड़ों परिवारों के लिए आशा की किरण बनकर उभरीं।
सीमा ढाका की यह उपलब्धि साबित करती है कि यदि इरादे नेक हों और जज्बा बुलंद हो, तो विपरीत परिस्थितियों में भी बड़ी से बड़ी सफलता हासिल की जा सकती है। आज वे न केवल दिल्ली पुलिस का गौरव हैं, बल्कि पूरे देश के लिए एक आदर्श बन चुकी हैं।



















