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पंजाब में परविंदर सिंह झोटा हत्याकांड पर गरमाई सियासत, अमन अरोड़ा ने केंद्र सरकार को दी नसीहत

पंजाब में परविंदर सिंह झोटा हत्याकांड पर गरमाई सियासत, अमन अरोड़ा ने केंद्र सरकार को दी नसीहत

टारगेट न्यूज़ ग्राउंड रिपोर्ट: पंजाब की राजनीति में इस समय कानून व्यवस्था और नशा विरोधी कार्यकर्ताओं की सुरक्षा को लेकर माहौल काफी गरमाया हुआ है। एंटी-ड्रग एक्टिविस्ट परविंदर सिंह झोटा की निर्मम हत्या और दिरबा में गुलजार सिंह की संदिग्ध मौत के मामलों ने तूल पकड़ लिया है। इस बीच, आम आदमी पार्टी के पंजाब प्रदेश अध्यक्ष और कैबिनेट मंत्री अमन अरोड़ा ने केंद्र सरकार और विशेष तौर पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के बयानों पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि केंद्र सरकार को इस संवेदनशील मुद्दे पर राजनीतिक रोटियां नहीं सेकनी चाहिए और न ही माहौल को और अधिक खराब करने का प्रयास करना चाहिए। अमन अरोड़ा ने जालंधर में मुख्यमंत्री भगवंत मान के आवास के बाहर मीडिया से बातचीत के दौरान कहा कि केंद्र को पंजाब सरकार के साथ मिलकर राज्य में कानून-व्यवस्था को मजबूत करने में सहयोग करना चाहिए, न कि इसमें राजनीति ढूंढनी चाहिए। गौरतलब है कि केंद्रीय गृह मंत्री ने हाल ही में घोषणा की थी कि केंद्र सरकार इन दोनों मामलों में पंजाब की भगवंत मान सरकार से जवाब तलब करेगी। इसके बाद से ही राज्य और केंद्र के बीच सियासी तनातनी और अधिक बढ़ गई है।

ग्राउंड से मुख्य जानकारी (Key Takeaways)

  • आम आदमी पार्टी के पंजाब अध्यक्ष अमन अरोड़ा ने केंद्र सरकार और गृह मंत्री पर राजनीतिक आग भड़काने का आरोप लगाया।
  • केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने परविंदर सिंह झोटा और गुलजार सिंह की मौत के मामलों पर पंजाब सरकार से रिपोर्ट मांगने की बात कही थी।
  • अमन अरोड़ा ने झोटा की हत्या को बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और पीड़ादायक बताते हुए पीड़ित परिवार से प्रशासन के साथ सहयोग करने की अपील की।
  • सरकार ने स्पष्ट किया है कि मुख्य आरोपी अश्विनी कुमार के पास आर्म्स लाइसेंस कैसे पहुंचा और पूर्व छापों के बावजूद कार्रवाई क्यों नहीं हुई, इसकी उच्चस्तरीय जांच की जा रही है।
  • नशे के खिलाफ लड़ाई को सामूहिक प्रयास बताते हुए आप नेता ने जनता और समाज से पुलिस को पूरा सहयोग देने की अपील की।

घटनाक्रम का सिलसिलेवार ब्योरा (Chronological Event Breakdown)

यह पूरा घटनाक्रम तब शुरू हुआ जब पंजाब में नशा तस्करों के खिलाफ मुखर रूप से आवाज उठाने वाले एंटी-ड्रग एक्टिविस्ट परविंदर सिंह झोटा की हत्या कर दी गई। इस घटना के तुरंत बाद पूरे राज्य में भारी रोष फैल गया। इसके साथ ही दिरबा के रहने वाले गुलजार सिंह की भी संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई, जिनके बारे में कहा गया कि उन्होंने जहर खा लिया था। इन दोनों घटनाओं ने पंजाब की कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवालिया निशान खड़े कर दिए। विपक्षी दलों के साथ-साथ केंद्रीय नेतृत्व ने भी पंजाब सरकार को घेरना शुरू कर दिया। इसी क्रम में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने पंजाब सरकार से इन हत्याओं और मौतों पर जवाब मांगने की बात कही। केंद्रीय गृह मंत्री के इस बयान के बाद राज्य सरकार बचाव की मुद्रा में आ गई, जिसके जवाब में कैबिनेट मंत्री अमन अरोड़ा ने मीडिया के सामने आकर राज्य का पक्ष रखा और केंद्र पर अनावश्यक राजनीति करने का आरोप मढ़ा। अरोड़ा ने बताया कि पुलिस ने मुख्य आरोपी अश्विनी कुमार के खिलाफ सख्त रुख अपना लिया है और सरकार इस मामले में किसी भी दोषी को बख्शने के मूड में नहीं है। हालांकि, मुख्य आरोपी को पहले भी छापों के बावजूद आर्म्स लाइसेंस कैसे मिल गया, इस पर स्थानीय पुलिस और प्रशासन से जवाब तलब किया जा रहा है और मुख्यमंत्री भगवंत मान खुद इस पूरे मामले की व्यक्तिगत तौर पर निगरानी कर रहे हैं।

प्रशासनिक व स्थानीय प्रतिक्रिया (Official Action & Public Reaction)

प्रशासनिक स्तर पर पंजाब सरकार और पुलिस महकमा पूरी तरह हरकत में आ गया है। जनता और मृतक के परिजनों के गुस्से को शांत करने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। सरकार ने आश्वासन दिया है कि न्याय मिलने में कोई कोर-कसर बाकी नहीं छोड़ी जाएगी। वहीं, स्थानीय लोगों और विभिन्न संगठनों में इस बात को लेकर भारी आक्रोश है कि नशा विरोधी अभियान चलाने वाले कार्यकर्ताओं को पर्याप्त सुरक्षा क्यों नहीं दी जा रही है।

मैं केंद्र सरकार और देश के गृह मंत्री से हाथ जोड़कर अनुरोध करता हूँ कि वे इस संवेदनशील मामले पर स्थिति को और अधिक न बिगाड़ें और पंजाब में शांति एवं कानून-व्यवस्था बनाए रखने में राज्य सरकार का समर्थन करें। परविंदर सिंह झोटा की हत्या एक अपूरणीय क्षति है, लेकिन इस पर राजनीतिक रोटियां सेकना बंद होना चाहिए। – अमन अरोड़ा, पंजाब अध्यक्ष, आप

आगे क्या? (What Lies Ahead)

आने वाले दिनों में इस मामले पर सियासत के और अधिक गर्म होने के आसार हैं। विपक्षी पार्टियां इस मुद्दे को विधानसभा और संसद तक ले जाने की तैयारी कर रही हैं। दूसरी ओर, पंजाब सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती नशा तस्करों के खिलाफ चल रहे अभियान को और अधिक पारदर्शी बनाना और जनता का विश्वास जीतना है। सरकार ने दावा किया है कि राज्य में अब तक हजारों तस्करों को सलाखों के पीछे भेजा जा चुका है और एंटी-ड्रग कमेटियों (WDCs और VDCs) के जरिए जमीनी स्तर पर निगरानी बढ़ाई जा रही है। हालांकि, अदालती प्रक्रियाओं और जमानत मिलने के प्रावधानों के चलते आने वाले समय में पुलिस और समाज के बीच समन्वय स्थापित करना एक बड़ी चुनौती बना रहेगा। यह देखना दिलचस्प होगा कि केंद्र और राज्य के इस टकराव के बीच पीड़ित परिवार को न्याय कब तक मिल पाता है और पंजाब की कानून-व्यवस्था पटरी पर कैसे लौटती है।

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