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जालंधर के वीरज शर्मा बने देश के नंबर-1 बैडमिंटन खिलाड़ी, 11 साल की कड़ी मेहनत लाई रंग

जालंधर के वीरज शर्मा बने देश के नंबर-1 बैडमिंटन खिलाड़ी, 11 साल की कड़ी मेहनत लाई रंग

टारगेट न्यूज़ ग्राउंड रिपोर्ट: जालंधर के उभरते हुए बैडमिंटन खिलाड़ी वीरज शर्मा ने अपनी कड़ी मेहनत, समर्पण और अट्टन संकल्प के बल पर देश भर में एक नया मुकाम हासिल किया है। पिछले 10 से 11 वर्षों के अथक प्रयासों के बाद, आखिरकार वीरज को वह प्रतिष्ठित मुकाम मिल ही गया जिसके लिए उन्होंने दिन-रात एक कर दिया था। सोमवार को जारी हुई ताजा रैंकिंग में उन्हें आधिकारिक तौर पर भारत का अंडर-17 लड़कों की श्रेणी में नंबर-1 बैडमिंटन खिलाड़ी घोषित किया गया। इस बड़ी उपलब्धि ने न केवल उनके परिवार और गृहनगर जालंधर का नाम रोशन किया है, बल्कि पूरे पंजाब राज्य के खेल जगत में एक नई ऊर्जा का संचार कर दिया है। उनकी यह सफलता राज्य के उभरते खिलाड़ियों के लिए एक बड़ी प्रेरणा बन गई है।

ग्राउंड से मुख्य जानकारी (Key Takeaways)

  • वीरज शर्मा अंडर-17 लड़कों की श्रेणी में भारत के नंबर-1 शटलर बने।
  • भुवनेश्वर में दिसंबर में हुई 37वीं सब-जूनियर नेशनल बैडमिंटन चैंपियनशिप में जीता था रजत पदक।
  • वर्तमान में बेंगलुरु स्थित प्रतिष्ठित प्रकाश पादुकोण बैडमिंटन अकादमी में ले रहे हैं विशेष प्रशिक्षण।
  • इन्फोसिस फाउंडेशन और खेलो इंडिया योजना के तहत मिल रहा है महत्वपूर्ण सहयोग।
  • पंजाब बैडमिंटन एसोसिएशन के अनुसार, राज्य के कई अन्य युवा खिलाड़ी भी राष्ट्रीय पटल पर लहरा रहे हैं परचम।

घटनाक्रम का सिलसिलेवार ब्योरा (Chronological Event Breakdown)

वीरज शर्मा के इस मुकाम तक पहुंचने की कहानी बेहद प्रेरणादायक और संघर्षों से भरी है। महज 6 वर्ष की कोमल उम्र में उन्होंने बैडमिंटन रैकेट थामा था। उनके माता-पिता राहुल शर्मा और संजिता शर्मा ने बताया कि वीरज रोजाना सुबह 4 बजे उठकर अपनी प्रैक्टिस के लिए जाया करते थे। उनके शुरुआती दिनों में कोच प्रवीण कुमार ने जालंधर के डीएवी इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी स्थित अकादमी में उन्हें बुनियादी तकनीक सिखाई। जैसे-जैसे वीरज की उम्र और खेल में रुचि बढ़ी, उनके परिवार ने उनकी प्रतिभा को तराशने के लिए बड़े कदम उठाए। मात्र 11 वर्ष की आयु में उन्हें पेशेवर ट्रेनिंग के लिए नोएडा स्थित राइज स्पोर्ट्स स्कूल भेज दिया गया। इसके बाद वीरज ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा और लगातार अपनी तकनीक व फिटनेस पर काम करते रहे। उनकी मेहनत का वास्तविक परिणाम तब सामने आया जब उन्होंने भुवनेश्वर में आयोजित 37वीं सब-जूनियर नेशनल बैडमिंटन चैंपियनशिप के अंडर-17 सिंगल्स के फाइनल में जगह बनाई और नाभा के जैशेर खंगूरा के खिलाफ शानदार मुकाबला खेलते हुए रजत पदक अपने नाम किया। इसी शानदार प्रदर्शन के बाद उनका चयन इन्फोसिस फाउंडेशन के माध्यम से हुआ और वह वर्तमान में बेंगलुरु स्थित प्रकाश पादुकोण बैडमिंटन अकादमी में देश के बेहतरीन कोचों की देखरेख में अपनी खेल कला को निखार रहे हैं। इसके अलावा, खेलो इंडिया योजना के तहत मिलने वाली सहायता से उनके सफर को और अधिक मजबूती मिली है।

प्रशासनिक व स्थानीय प्रतिक्रिया (Official Action & Public Reaction)

वीरज की इस राष्ट्रीय उपलब्धि पर खेल प्रेमियों, स्थानीय नागरिकों और प्रशासनिक अधिकारियों में भारी उत्साह देखा जा रहा है। पंजाब बैडमिंटन एसोसिएशन के सचिव रितिन खूराना ने वीरज की सफलता को राज्य के खेल इतिहास का एक और मील का पत्थर बताया है। उन्होंने कहा कि हाल ही में लुधियाना के वजीर शर्मा ने भी अंडर-15 वर्ग में भारत का नंबर-1 स्थान हासिल किया था। इसके अलावा तन्वी शर्मा, इनायत गुलाटी और जैशेर खंगूरा जैसे कई अन्य सितारे भी पंजाब से निकलकर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का नाम रोशन कर रहे हैं। हाल ही में जैशेर खंगूरा ने काहिरा में आयोजित जूनियर वर्ल्ड बैडमिंटन चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीतकर देश का मान बढ़ाया था, जिनके स्वागत के लिए मोहाली एयरपोर्ट पर खुद रितिन खूराना और सांसद गुरमीत सिंह मीत हेयर पहुंचे थे।

माता-पिता राहुल शर्मा और संजिता शर्मा ने गर्व से कहा, यह हमारे परिवार के लिए सबसे बड़ा और खुशी का दिन है। वह सिर्फ छह साल का था जब उसने शुरुआत की थी। हम दिनभर उसके स्कूल, प्रैक्टिस और रोजमर्रा की भागदौड़ में लगे रहते थे। अब हमारा एकमात्र सपना वीरज को आने वाले वर्षों में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश के लिए पदक जीतते हुए देखना है।

आगे क्या? (What Lies Ahead)

भारत के नंबर-1 अंडर-17 खिलाड़ी बनने के बाद वीरज शर्मा के सामने अब अंतरराष्ट्रीय मंचों पर देश का प्रतिनिधित्व करने की बड़ी चुनौती और अवसर दोनों हैं। बेंगलुरु की प्रकाश पादुकोण अकादमी में उन्नत प्रशिक्षण और खेलो इंडिया तथा इन्फोसिस फाउंडेशन के वित्तीय व तकनीकी सहयोग से उनकी क्षमता में और अधिक निखार आने की उम्मीद है। उनके माता-पिता और कोचों का मुख्य फोकस अब उन्हें एशियाई खेलों, विश्व जूनियर चैंपियनशिप और आगामी अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंटों के लिए तैयार करना है। जिस प्रकार से पंजाब के युवा शटलर लगातार राष्ट्रीय रैंकिंग में शीर्ष पर काबिज हो रहे हैं, उससे यह साफ जाहिर होता है कि आने वाले समय में भारतीय बैडमिंटन को विश्व स्तर पर एक नई ऊंचाई मिलने वाली है, जिसमें वीरज शर्मा एक मुख्य स्तंभ साबित हो सकते हैं।

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