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भारत विविधताओं का देश है: विजयदशमी पर आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के बड़े बयान और मुख्य बातें

भारत विविधताओं का देश है: विजयदशमी पर आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के बड़े बयान और मुख्य बातें

टारगेट न्यूज़: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत ने नागपुर में आयोजित विजयादशमी उत्सव के दौरान देश और दुनिया को संबोधित करते हुए भारत की सांस्कृतिक विविधता, सामाजिक समरसता और राष्ट्रीय सुरक्षा पर कई महत्वपूर्ण विचार रखे। उन्होंने स्पष्ट तौर पर कहा कि भारत विभिन्नताओं का एक ऐसा अद्भुत देश है, जहां हर संस्कृति और विचारधारा को साथ लेकर चलने की अनूठी क्षमता है। आरएसएस प्रमुख का यह संबोधन ऐसे समय में आया है जब देश और दुनिया भर में वैचारिक और सामाजिक ध्रुवीकरण की स्थिति गहरी हो रही है। अपने संबोधन में उन्होंने समाज के सभी वर्गों से एकजुट रहने, देश की अखंडता को मजबूत करने और बाहरी चुनौतियों का डटकर मुकाबला करने का आह्वान किया। उत्सव के दौरान शस्त्र पूजन की प्राचीन परंपरा का निर्वहन करते हुए संघ प्रमुख ने देश की सुरक्षा प्रणालियों और सशस्त्र बलों की भी सराहना की।

मुख्य बिंदु एवं हाइलाइट्स (Key Highlights)

  • मोहन भागवत ने जोर देकर कहा कि भारत की पहचान इसकी विविधता में एकता है और हमें इसे सहेज कर रखना चाहिए।
  • देश की आंतरिक सुरक्षा और सामाजिक सौहार्द को मजबूत करने के लिए आपसी भेदभाव को मिटाने की आवश्यकता पर बल दिया गया।
  • वैश्विक स्तर पर भारत की बढ़ती साख और प्रभाव की सराहना करते हुए आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को दोहराया गया।
  • महिला सुरक्षा और समाज में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी को राष्ट्र निर्माण के लिए अनिवार्य बताया गया।

विस्तृत समाचार एवं पूरा घटनाक्रम (Detailed Report)

विजयादशमी के पावन अवसर पर नागपुर के रेशमीबाग मैदान में आयोजित भव्य समारोह में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत ने देश के नाम अपने संदेश में कई दूरदर्शी बातें कहीं। उन्होंने कहा कि भारत केवल एक भौगोलिक भूखंड नहीं है, बल्कि यह एक जीवंत राष्ट्र है जिसकी अपनी एक शाश्वत संस्कृति और जीवन मूल्य हैं। विविधता को भारत की सबसे बड़ी ताकत बताते हुए उन्होंने कहा कि यहां अनगिनत भाषाएं, बोलियां, पंथ और जातियां हैं, लेकिन इन सबके बावजूद राष्ट्र की अंतरात्मा हमेशा से एक ही रही है। उन्होंने समाज में बढ़ती वैमनस्यता की प्रवृत्तियों पर चिंता व्यक्त की और लोगों से अपील की कि वे तुच्छ स्वार्थों से ऊपर उठकर राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखें। संघ प्रमुख का यह बयान उन तत्वों के लिए एक कड़ा संदेश माना जा रहा है जो देश की एकता को खंडित करने का प्रयास करते हैं।

अपने संबोधन के दौरान मोहन भागवत ने आधुनिक तकनीक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और साइबर सुरक्षा के बढ़ते खतरों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि आज का युग तकनीकी प्रगति का युग है, लेकिन इसके साथ ही इसके दुरुपयों से बचना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। युवाओं को सही दिशा देने और उन्हें राष्ट्र निर्माण की मुख्यधारा से जोड़ने पर विशेष जोर दिया गया। उन्होंने शिक्षा प्रणाली में भारतीय मूल्यों और संस्कारों को शामिल करने की वकालत की ताकि आने वाली पीढ़ी अपनी जड़ों से जुड़ी रहे। इसके साथ ही, उन्होंने देश के आर्थिक विकास और स्वदेशी उत्पादों को अपनाने के महत्व को भी रेखांकित किया।

देश की सीमाओं और बाह्य सुरक्षा के संदर्भ में बात करते हुए संघ प्रमुख ने भारतीय सेना के पराक्रम और शौर्य की मुक्त कंठ से प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि आज का भारत अपनी रक्षा करने में पूरी तरह सक्षम है और किसी भी परिस्थिति से निपटने के लिए हमारी सेनाएं पूरी मुस्तैदी से तैयार हैं। पड़ोसी देशों के साथ संबंधों और वैश्विक कूटनीति पर चर्चा करते हुए उन्होंने शांति और सह-अस्तित्व के भारतीय सिद्धांतों को दुहराया, साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि राष्ट्रीय सुरक्षा से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा।

राष्ट्र की सच्ची प्रगति तभी संभव है जब समाज का अंतिम व्यक्ति भी सशक्त हो और उसे विकास के समान अवसर मिलें। विविधता में एकता ही हमारी सबसे बड़ी पहचान और रक्षा कवच है। – मोहन भागवत, आरएसएस प्रमुख

भविष्य का असर एवं निष्कर्ष (Future Impact & Conclusion)

मोहन भागवत का विजयादशमी का यह संबोधन आने वाले समय में देश की सामाजिक और राजनीतिक दिशा को प्रभावित करने की क्षमता रखता है। उनके द्वारा उठाए गए मुद्दे जैसे कि सामाजिक समरसता, स्वदेशी का प्रसार, और राष्ट्र की सुरक्षा, भारतीय नीति निर्माताओं और नागरिकों दोनों के लिए मार्गदर्शक का काम करेंगे। इस प्रकार के उद्बोधन समाज में सकारात्मक चर्चा को बढ़ावा देते हैं और लोगों को अपने कर्तव्यों के प्रति जागरूक करते हैं। निष्कर्ष रूप में, यह संदेश देशवासियों को एकजुट होकर एक सशक्त, समृद्ध और आत्मानिर्भर भारत के निर्माण के लिए प्रेरित करता है, जहां हर नागरिक को अपनी संस्कृति पर गर्व हो और देश वैश्विक मंच पर एक सिरमौर के रूप में स्थापित हो सके।

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