नई दिल्ली। राजवीर दीक्षित
(High Court asks CJP leaders: ‘Aren’t you Gen Z?’) दिल्ली हाईकोर्ट ने बुधवार को कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेताओं सौरव दास और आशुतोष रांका की याचिका पर सुनवाई के दौरान उनके प्रदर्शन के उद्देश्य और शांति बनाए रखने के बांड के कथित उल्लंघन पर सवाल उठाए। दोनों नेताओं ने विशेष कार्यपालक मजिस्ट्रेट के हिरासत बढ़ाने के आदेश को चुनौती दी थी, लेकिन सुनवाई के दौरान अपनी याचिका वापस ले ली।
न्यायमूर्ति सुब्रमणियम प्रसाद ने कहा कि अदालत आम तौर पर फैसले के बजाय निर्णय लेने की प्रक्रिया की समीक्षा करती है, जब तक कि फैसला ऐसा न हो जो न्यायिक विवेक को झकझोर दे। अदालत ने यह भी पूछा कि जब शांति बनाए रखने के बांड का कथित तौर पर दोबारा उल्लंघन हुआ, तो अधिकारियों से सख्त प्रमाण की मांग क्यों की जा रही है।
‘आप Gen Z नहीं हैं?’ उम्र पूछकर अदालत की टिप्पणी
सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति प्रसाद ने दोनों नेताओं की उम्र पूछी। उनके वकील अभिक चिमनी ने बताया कि सौरव दास 27 और आशुतोष रांका 31 वर्ष के हैं। इस पर न्यायाधीश ने टिप्पणी की, “तो आप Gen Z नहीं हैं?”
न्यायाधीश ने कहा कि शुरुआत में प्रदर्शन में छात्र और युवा शामिल थे, लेकिन बाद में आंदोलन की मांगों में ‘सत्ता परिवर्तन’ और ‘मतपत्र’ जैसे मुद्दे सामने आने लगे। अदालत ने पूछा कि प्रदर्शन का वास्तविक उद्देश्य क्या है और दोनों नेता सामान्य तौर पर क्या करते हैं।
हिरासत बढ़ाने के आदेश को दी थी चुनौती
दोनों नेताओं ने मंगलवार को हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर 19 अक्टूबर के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें उनकी न्यायिक हिरासत दो दिन और बढ़ा दी गई थी। बुधवार को याचिका वापस ले ली गई।
दोनों की हिरासत बुधवार को समाप्त होनी थी और उन्हें मंदिर मार्ग स्थित विशेष कार्यपालक मजिस्ट्रेट के समक्ष फिर पेश किया जाना था। हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि मजिस्ट्रेट के आदेश को चुनौती देने के लिए अपीलीय अदालत का विकल्प उपलब्ध है।
जंतर-मंतर में प्रवेश के आरोप में हिरासत
सौरव दास और आशुतोष रांका को 13 अक्टूबर को हिरासत में लिया गया था। आरोप है कि वे बंद गेट पार कर जंतर-मंतर में दाखिल हुए, जिसे पहले निर्धारित प्रदर्शन स्थल के रूप में अधिसूचित नहीं रखा गया था। इसके बाद उन्हें पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा गया था।
19 अक्टूबर को विशेष कार्यपालक मजिस्ट्रेट ने उनकी हिरासत 21 अक्टूबर तक बढ़ाने का आदेश दिया था।
जमानत की कोशिशों में जमानतदारों पर उठे सवाल
कार्यवाही के रिकॉर्ड के अनुसार, दोनों नेताओं की जमानत के लिए अब तक चार जमानतदार पेश किए गए। इनमें से दो के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज होने की जानकारी सामने आई, जबकि अन्य दो के पहचान दस्तावेजों और विवरण पर सवाल उठे।
पहली कोशिश में 50-50 हजार रुपये के निजी मुचलकों पर दो जमानतदार पेश किए गए थे। बाद में उनके खिलाफ मामले दर्ज होने की जानकारी सामने आई और वकीलों ने गलती स्वीकार करते हुए माफी मांगी।
दूसरी कोशिश में पेश जमानतदारों के आधार कार्ड पर लगी तस्वीरें कथित तौर पर दस्तावेजों से मेल नहीं खाती थीं और कागजात में मोबाइल नंबर भी नहीं थे। मजिस्ट्रेट ने जमानतदारों से अलग-अलग पूछताछ की। रिकॉर्ड के मुताबिक, उन्होंने नेताओं को चार साल से जानने का दावा किया, लेकिन उनके परिवार और घर से जुड़ी बुनियादी जानकारी नहीं दे पाए। उन्होंने यह भी कहा कि जमानतदार बनने के लिए उन पर दबाव डाला गया था।
CJP ने आरोप लगाया है कि दिल्ली पुलिस दोनों नेताओं की जमानत में जानबूझकर बाधाएं पैदा कर रही है। हालांकि, जमानत की पिछली कोशिशों में दस्तावेजों और जमानतदारों से जुड़ी समस्याएं भी कार्यवाही के रिकॉर्ड में दर्ज हैं।
फिलहाल, दोनों नेताओं की याचिका वापस लिए जाने के बाद हिरासत और जमानत से जुड़ी आगे की कार्रवाई पर नजर रहेगी।


















