ऊना। राजवीर दीक्षित
(Ensure timely disposal of pending audit issues: Sanjay Ratna) सरकारी धनराशि का समय पर उपयोग सुनिश्चित करें और लंबित ऑडिट पैरों का निपटारा प्राथमिकता के आधार पर करें। विधानसभा की स्थानीय निधि लेखा समिति के सभापति संजय रत्न ने वीरवार को ऊना में आयोजित बैठक में अधिकारियों को ये निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सरकारी धन के उपयोग में पारदर्शिता बरती जाए और लंबित वित्तीय मामलों के निपटारे में अनावश्यक देरी न हो।
जिला परिषद सभागार में आयोजित बैठक में समिति के सदस्य एवं विधायक इंद्रदत्त लखनपाल, मलेंद्र राजन, कुलदीप सिंह राठौर और विवेक शर्मा भी उपस्थित रहे। समिति ने विभिन्न विभागों के लंबित ऑडिट पैरों, वित्तीय प्रबंधन और सरकारी धन के उपयोग की समीक्षा की।
सभापति ने निर्देश दिए कि 31 दिसंबर तक निपटाए जा सकने वाले ऑडिट पैरों की पहचान कर उनके निपटारे के लिए समयबद्ध कार्रवाई की जाए। उन्होंने समिति की ओर से मांगी गई जानकारी एक माह के भीतर उपलब्ध करवाने तथा ऑडिट पैरों से संबंधित सूचनाएं समय-समय पर संबंधित निदेशालयों को भेजने के निर्देश भी दिए।
जनकल्याण के कार्यों में हो सरकारी धन का उपयोग
संजय रत्न ने कहा कि सरकारी धनराशि अनावश्यक रूप से बिना उपयोग के नहीं पड़ी रहनी चाहिए। विकास कार्यों और जनकल्याणकारी योजनाओं को समय पर पूरा किया जाए, ताकि आम जनता को उनका लाभ मिल सके। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में सरकार जनता के प्रति जवाबदेह होती है। विधानसभा में पक्ष और विपक्ष मिलकर नीतियां बनाते हैं, जबकि उन्हें प्रभावी ढंग से लागू करने की जिम्मेदारी अधिकारियों की होती है। ऐसे में प्रशासनिक अमले का सक्रिय सहयोग जरूरी है।
उन्होंने अधिकारियों को उपयोगिता प्रमाणपत्र समय पर प्रस्तुत करने, वित्तीय रिकॉर्ड दुरुस्त रखने और लंबित ऑडिट पैरों के निपटारे में देरी से बचने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सरकारी योजनाओं का लाभ पात्र लोगों तक पहुंचाना और जनता को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध करवाना प्राथमिकता होनी चाहिए।
सभापति ने अधिकारियों से कहा कि वे विकास कार्यों को गति देने के लिए स्थानीय विधायकों के साथ समन्वय बनाए रखें और उनका सहयोग व मार्गदर्शन लें। यदि किसी कार्य में बदलाव या कन्वर्जन की आवश्यकता हो, तो संबंधित विधायक से विचार-विमर्श कर नियमानुसार आवश्यक कदम उठाएं।
बकाया किराये की वसूली के लिए वन-टाइम सेटलमेंट की अनुशंसा
बैठक में शहरी निकायों के व्यावसायिक परिसरों और दुकानों से संबंधित लंबे समय से लंबित किराये तथा पेनल्टी की वसूली के मामलों की भी समीक्षा की गई। सभापति ने कहा कि बकाया राशि की वसूली को सुगम बनाने के लिए समिति प्रदेशभर में वन-टाइम सेटलमेंट व्यवस्था लागू करने की अनुशंसा सरकार से करेगी। इस संबंध में अंतिम निर्णय सरकार के स्तर पर लिया जाएगा।
पुराने ऑडिट पैरों के निपटारे के निर्देश
सभापति ने निर्देश दिए कि ऊना जिले के शहरी निकाय वर्ष 2000 से पहले के ऐसे ऑडिट पैरों, जिनमें बड़ी राशि शामिल नहीं है, को नियमानुसार बट्टे खाते में डालने के लिए सक्षम प्राधिकारी के समक्ष मामला प्रस्तुत करने की प्रक्रिया अपनाएं। वहीं, वर्ष 2000 के बाद के लंबित ऑडिट पैरों के निपटारे के लिए नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई की जाए। उन्होंने इस प्रक्रिया में संबंधित नियमों और सक्षम प्राधिकारी की स्वीकृति का पालन सुनिश्चित करने पर जोर दिया।
छात्र कल्याण निधि का सदुपयोग करें शिक्षण संस्थान
संजय रत्न ने जिले के महाविद्यालयों के प्रधानाचार्यों को 15 दिनों के भीतर छात्र कल्याण निधि में उपलब्ध राशि और विद्यार्थियों के हित में किए जा रहे खर्च का पूरा ब्योरा समिति को उपलब्ध करवाने के निर्देश दिए। उन्होंने निधि का उचित लेखा-जोखा रखने और इसका उपयोग विद्यार्थियों के हित में सुनिश्चित करने पर जोर दिया।
उन्होंने कहा कि महाविद्यालयों, पॉलिटेक्निक संस्थानों और आईटीआई सहित शिक्षण संस्थानों में उपलब्ध छात्र कल्याण निधि का इस्तेमाल विद्यार्थियों के कल्याण, पुस्तकालयों के विकास और उन्हें बेहतर सुविधाएं उपलब्ध करवाने जैसे उद्देश्यों के लिए किया जाना चाहिए।
पूरी तैयारी और सही जानकारी के साथ आएं अधिकारी
समिति सभापति ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि विधानसभा की समितियों के समक्ष किसी भी मामले को प्रस्तुत करने से पहले उसकी पूरी तैयारी करें। मांगी गई जानकारी स्पष्ट, सही और तथ्यों पर आधारित होनी चाहिए। बैठक में कुछ मामलों पर संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर उन्होंने संबंधित अधिकारियों को रिकॉर्ड के आधार पर पूरी जानकारी प्रस्तुत करने को कहा। उन्होंने वित्तीय मामलों में जवाबदेही बनाए रखने, अधूरी या गलत जानकारी देने से बचने और लंबित मामलों की नियमित समीक्षा कर उनके निपटारे के लिए विभागीय समन्वय सुनिश्चित करने पर जोर दिया।
उपायुक्त जतिन लाल ने समिति का स्वागत करते हुए बैठक में दिए गए निर्देशों की अनुपालना सुनिश्चित करने का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि संबंधित विभागों के साथ समन्वय बैठकें कर लंबित ऑडिट पैरों के निपटारे के लिए प्रभावी प्रयास किए जाएंगे।
बैठक में पुलिस अधीक्षक सचिन हिरेमठ, अतिरिक्त उपायुक्त ईशांत जसवाल सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।


















