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PGI प्रोफेसर को बड़ी राहत! CAT ने VRS खारिज करने के आदेश किए रद्द

चंडीगढ़।राजवीर दीक्षित

केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (CAT) की चंडीगढ़ पीठ ने PGIMER के प्रोफेसर संदीप ग्रोवर को बड़ी राहत देते हुए स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति और इस्तीफे की अर्जी खारिज करने संबंधी आदेश रद्द कर दिए हैं। अधिकरण ने संस्थान के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी को उनका मामला नए सिरे से विचार के लिए PGIMER के अध्यक्ष के समक्ष रखने का निर्देश दिया है।

ग्रोवर ने अधिकरण में 10 मार्च और 9 मई, 2026 को जारी आदेशों को चुनौती दी थी। उनका कहना था कि 90 दिन के नोटिस के बावजूद उन्हें सेवा से मुक्त नहीं किया गया।

ग्रोवर वर्ष 2000 में PGIMER में जूनियर रेजिडेंट के तौर पर नियुक्त हुए थे। बाद में वह असिस्टेंट प्रोफेसर और एसोसिएट प्रोफेसर बने तथा 12 मई, 2017 से प्रोफेसर के पद पर कार्यरत हैं।

उन्होंने तीन महीने का नोटिस देकर स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति मांगी थी। वैकल्पिक तौर पर उन्होंने इस्तीफा देने का अनुरोध भी किया था। संस्थान ने स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति की अर्जी यह कहते हुए खारिज कर दी थी कि उनकी 20 वर्ष की अर्हक सेवा पूरी नहीं हुई है। वहीं, इस्तीफा स्वीकार न करने के पीछे विभाग में अनुभवी शिक्षकों की कमी और कामकाज की जरूरतों का हवाला दिया गया था।

ग्रोवर की ओर से दलील दी गई कि प्रोफेसर का इस्तीफा स्वीकार करने का अधिकार PGIMER के अध्यक्ष के पास है, लेकिन उनका मामला सक्षम प्राधिकारी के समक्ष रखा ही नहीं गया। दूसरी ओर, संस्थान की ओर से कहा गया कि इस्तीफा केवल आवेदन देने या नोटिस अवधि पूरी होने से प्रभावी नहीं होता; इसके लिए औपचारिक स्वीकृति और सेवा से मुक्त किया जाना जरूरी है।

दलीलें सुनने के बाद अधिकरण ने पाया कि विवादित आदेश सक्षम प्राधिकारी की मंजूरी के बिना जारी किए गए प्रतीत होते हैं। इसी आधार पर CAT ने 10 मार्च और 9 मई के आदेशों को रद्द कर दिया।                                    अधिकरण ने निर्देश दिया कि वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी प्रोफेसर का मामला PGIMER अध्यक्ष के समक्ष रखें। सक्षम प्राधिकारी को आवेदक की दलीलों पर विचार करते हुए कानून के अनुसार कारणों सहित स्पष्ट आदेश पारित करना होगा। यह प्रक्रिया आदेश की प्रमाणित प्रति प्राप्त होने के तीन सप्ताह के भीतर पूरी करनी होगी।

CAT ने स्पष्ट किया कि उसने इस्तीफे के अनुरोध के गुण-दोष पर कोई राय नहीं दी है। अंतिम निर्णय सक्षम प्राधिकारी को ही कानून के अनुसार लेना होगा।

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