द टारगेट न्यूज़:
चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड (सीएचबी) ने शहर के हजारों निवासियों के लिए एक बड़े फैसले के तहत जनरल पावर ऑफ Attorney (जीपीए) ट्रांसफर नीति को फिर से शुरू कर दिया है। यह निर्णय सीएचबी के निदेशक मंडल की बैठक में लिया गया, जिसकी अध्यक्षता सीएचबी के अध्यक्ष एवं मुख्य सचिव एच. राजेश प्रसाद ने मंगलवार को की। इस बैठक में ऑलॉटीज की कई लंबे समय से लंबित मांगों को मंजूरी दी गई, जिनमें जीपीए ट्रांसफर नीति की पुनरुत्पत्ति, स्मॉल फ्लैट्स स्कीम-2006 और अफोर्डेबल रेंटल हाउसेस कॉम्प्लेक्स स्कीम (एआरएचसी) के लाइसेंसधारियों के लिए वन-टाइम ब्याज माफी, एआरएचसी के तहत लाइसेंस फीस का युक्त्रीकरण और कर्मचारियों के लिए एक्स-ग्रेशिया व दिवाली गिफ्ट शामिल हैं। बोर्ड ने कुछ संशोधनों के साथ 2016 की जीपीए ट्रांसफर नीति को छह महीने की अवधि के लिए एकमुश्त अपवाद के रूप में सीमित समय के लिए अनुमोदित किया है। यह नीति केवल उन जीपीए तक सीमित है जो सुप्रीम कोर्ट के सूरज लैंप मामले के आदेश के अनुसार 11 अक्टूबर 2011 से पहले निष्पादित किए गए थे। बता दें कि बोर्ड ने 2016 में पुरानी संपत्ति के लेनदेन को नियमित करने के लिए नीति शुरू की थी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट के फैसले और प्रशासन के निर्देशों के बाद जनवरी 2018 से जीपीए और स्पेशल पावर ऑफ Attorney के आधार पर ट्रांसफर आवेदन स्वीकार करना बंद कर दिया था। सीएचबी रेजिडेंट्स वेलफेयर फेडरेशन के चेयरमैन निर्मल दत्त के अनुसार, इस कदम से लगभग 30,000 मकान मालिकों को फायदा मिलने की उम्मीद है। इसके अलावा, बैठक में स्मॉल फ्लैट्स स्कीम-2006 और एआरएचसी के लाइसेंसधारियों के लिए 20 करोड़ रुपये तक की ब्याज माफी योजना की भी सिफारिश की गई, जिससे लगभग 14,000 ऑलॉटीज को राहत मिलेगी। इस योजना का लाभ उठाने के लिए लाइसेंसधारियों को 31 अक्टूबर 2026 तक के सभी बकायों का भुगतान 31 अक्टूबर 2027 से पहले करना होगा। बोर्ड ने एआरएचसी के तहत आने वाले फ्लैटों की लाइसेंस फीस को स्मॉल फ्लैट्स स्कीम-2006 के बराबर करने की मांग को भी मंजूरी दे दी है, बशर्ते लाभार्थियों की सकल वार्षिक आय सभी स्रोतों से 1.5 लाख रुपये से कम हो। मुख्य सचिव ने स्पष्ट किया कि ये सभी प्रस्तावित उपाय यूटी प्रशासक के अंतिम अनुमोदन के बाद ही प्रभावी होंगे।


















