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पंचकूला प्रशासन ने पराग जलाने की घटनाओं पर लगाम कसने के लिए ड्रोन निगरानी शुरू की

पंचकूला प्रशासन ने पराग जलाने की घटनाओं पर लगाम कसने के लिए ड्रोन निगरानी शुरू की

द टारगेट न्यूज़:

पंचकूला कृषि विभाग ने जिले में पराली जलाने की घटनाओं पर लगाम कसने के लिए पहली बार ड्रोन आधारित निगरानी शुरू की है। इसके साथ ही प्रशासन ने नियमों का उल्लंघन करने वाले किसानों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने, चालान काटने और न्यूनतम समर्थन मूल्य यानी एमएसपी पर फसल बेचने पर संभावित प्रतिबंध लगाने की चेतावनी दी है। ड्रोन के माध्यम से चिन्हित गांवों और संवेदनशील क्षेत्रों पर नजर रखी जाएगी। विशेष रूप से दोपहर 3 बजे से रात 9 बजे के बीच निगरानी को और अधिक तेज किया जाएगा ताकि धान के अवशेष जलाने की घटनाओं का तुरंत पता लगाया जा सके। कृषि विभाग के उप निदेशक राकेश पोरिया ने बताया कि संदिग्ध उल्लंघनों के मामलों में त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए सटीक स्थान और समय के साथ जियो-टैग की गई तस्वीरें और वीडियो रिकॉर्डिंग के जरिए दस्तावेजीकरण किया जाएगा। धान के अवशेष जलाते हुए पाए जाने वाले किसानों पर निर्धारित नियमों के तहत कार्रवाई की जाएगी, जिसमें एफआईआर दर्ज करना, चालान जारी करना और उनके राजस्व रिकॉर्ड में लाल एंट्री (red entry) शामिल है। लागू नियमों के अनुसार इस तरह की लाल एंट्री से मंडियों में न्यूनतम समर्थन मूल्य पर कृषि उपज बेचने की उनकी पात्रता भी प्रभावित हो सकती है। विभाग ने किसानों से फसल अवशेष जलाने से बचने और वैज्ञानिक तरीकों से पराली का प्रबंधन अपनाने का आग्रह किया है। साथ ही चेतावनी दी गई है कि अवशेष जलाने से मिट्टी की उर्वरता कम होती है और वायु प्रदूषण में भी काफी वृद्धि होती है। इस बीच, पंचकूला की अनाज मंडियों में मौजूदा खरीफ खरीद सीजन के दौरान 75,857 मीट्रिक टन धान की खरीद की जा चुकी है, जिसमें से लगभग 86 प्रतिशत यानी 65,075 मीट्रिक टन धान का उठाव हो चुका है। जिले भर में दो सरकारी एजेंसियों—हेफेड और हरियाणा वेयरहाउसिंग कॉरपोरेशन द्वारा खरीद और उठाव का कार्य सुचारू रूप से किया जा रहा है। बारवाला में सबसे अधिक 33,390 मीट्रिक टन धान की खरीद दर्ज की गई है।

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