द टारगेट न्यूज़:
चंडीगढ़ के स्टेट एक्सपर्ट अप्रेजल कमेटी (SEAC) ने नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) से आग्रह किया है कि वह गोदरेज प्रॉपर्टीज लिमिटेड की याचिका को जुर्माने के साथ खारिज कर दे। यह मामला इंडस्ट्रियल एरिया फेज-1 स्थित कमर्शियल कॉम्प्लेक्स ‘गोदरेज एटेर्निया’ से जुड़ा है। गोदरेज प्रॉपर्टीज ने सेंट्रल गवर्नमेंट द्वारा प्रोजेक्ट की पर्यावरण मंजूरी (पर्यावरण क्लीयरेंस) रद्द किए जाने के फैसले को एनजीटी में चुनौती दी है। एसईएसी ने अपने औपचारिक जवाब में इस अपील को खारिज करने की मांग की है। गोदरेज प्रॉपर्टीज ने नेशनल बोर्ड फॉर वाइल्डलाइफ की स्टैंडिंग कमेटी (SCNBWL) की पूर्व मंजूरी के बिना इस कमर्शियल कॉम्प्लेक्स का निर्माण कार्य पूरा कर लिया था। इस प्रोजेक्ट को शुरुआत में 26 फरवरी 2009 को पर्यावरण मंजूरी मिल गई थी, लेकिन यह प्रोजेक्ट सुखना वाइल्डलाइफ सैंक्चुअरी और चंडीगढ़ सिटी बर्ड सैंक्चुअरी के 10 किलोमीटर के दायरे में स्थित था। सुप्रीम कोर्ट के गोवा फाउंडेशन मामले के निर्देशों और पर्यावरण मंत्रालय के 2007 के सर्कुलर के तहत वन्यजीव की मंजूरी लेना अनिवार्य था। एसईएसी ने तर्क दिया कि जनवरी 2017 में इको-सेंसिटिव जोन की बाद की अधिसूचना, शुरुआती अनिवार्य वन्यजीव अनुमति के बिना किए गए भारी निर्माण को पूर्वव्यापी रूप से वैध या नियमित नहीं कर सकती है। सेंट्रल एम्पावर्ड कमेटी (CEC) की गैर-अनुपालन रिपोर्टों और इस साल की शुरुआत में जारी कानूनी निर्देशों का संज्ञान लेते हुए, पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEF&CC) ने 30 सितंबर 2026 को 2009 की पर्यावरण मंजूरी को औपचारिक रूप से रद्द कर दिया था। इसके जवाब में, गोदरेज प्रॉपर्टीज ने ट्रिब्यूनल के समक्ष अपील और एक अंतरिम आवेदन दायर किया। हालांकि, एक हलफनामे में एसईएसी ने केंद्र सरकार के आदेश का बचाव किया और तर्क दिया कि एसईएसी के खिलाफ डेवलपर की अपील कानूनी रूप से समय से पहले की है, क्योंकि राज्य समिति ने कोई अलग से अपील करने योग्य आदेश पारित नहीं किया था। डॉ. अविनाश कुमार शारदा की अध्यक्षता में 8 अक्टूबर 2026 को हुई अपनी 69वीं बैठक के निर्णयों को उजागर करते हुए, एसईएसी ने कहा कि MoEF&CC ने नियामक उल्लंघनों के लिए केंद्रीय स्तर पर मंजूरी पहले ही रद्द कर दी थी।


















