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खास खबर: बैसाखी मेले में खून-खराबा! श्रद्धालुओं के भेष में आए हमलावरों ने मचाया आतंक, प्रशासन पर उठे बड़े सवाल

नंगल । राजवीर दीक्षित

(Breaking News: Bloodshed at the Baisakhi fair! Attackers disguised as devotees created chaos, raising serious questions about the administration.)पंजाब के जिला रूपनगर की तहसील नंगल के गांव दड़ोली में बैसाखी जैसे पवित्र और खुशियों भरे त्योहार के दिन उस वक्त अफरा-तफरी और डर का माहौल बन गया, जब मेले में श्रद्धालु बनकर आए कुछ असामाजिक तत्वों ने अचानक हिंसक रूप ले लिया। तेजधार हथियारों से लैस इन हमलावरों ने गांव के दो लोगों पर जानलेवा हमला कर दिया, जिससे पूरे इलाके में दहशत फैल गई।

मिली जानकारी के अनुसार, हमलावरों ने गांव निवासी बहादुर सिंह को जबरन उठाकर नहर में फेंकने की कोशिश की। हालात इतने गंभीर हो गए कि मौके पर मौजूद लोगों में चीख-पुकार मच गई। इसी दौरान जर्नैल सिंह ने अपनी जान की परवाह किए बिना बहादुर सिंह को हमलावरों के चंगुल से छुड़ाया और उसे नहर में गिरने से बचा लिया।

हालांकि इस दौरान दोनों गंभीर रूप से घायल हो गए। बहादुर सिंह के सिर पर गहरी चोट आई, जबकि जर्नैल सिंह का हाथ (गुट) तेजधार हथियार के वार से बुरी तरह जख्मी हो गया।

जैसे ही घटना की खबर फैली, गांव के लोग बड़ी संख्या में मौके पर इकट्ठा हो गए। ग्रामीणों ने बहादुरी दिखाते हुए पांच हमलावरों को मौके पर ही पकड़ लिया और पुलिस के हवाले कर दिया। दोनों घायलों को तुरंत सिविल अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनका इलाज जारी है।

पुलिस ने पीड़ितों के बयान दर्ज कर लिए हैं और मामले की जांच शुरू कर दी गई है।

लेकिन इस घटना ने कई बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। बैसाखी जैसे बड़े धार्मिक आयोजन के दौरान सुरक्षा व्यवस्था इतनी कमजोर क्यों थी? आखिर कैसे हमलावर तेजधार हथियार लेकर मेले में पहुंच गए और किसी को भनक तक नहीं लगी? क्या पुलिस और खुफिया तंत्र की ओर से कोई लापरवाही हुई?

आमतौर पर ऐसे मेलों में बड़ी संख्या में लोग जुटते हैं और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम होने चाहिए। लेकिन दड़ोली की इस घटना ने प्रशासन की तैयारियों पर सवालिया निशान लगा दिया है।

ग्रामीणों और पीड़ित परिवारों ने प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि पकड़े गए आरोपियों के खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए, ताकि भविष्य में कोई भी त्योहारों की आड़ में ऐसी वारदात को अंजाम देने की हिम्मत न कर सके।

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