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इंजीनियरिंग से क्रिकेट के मैदान तक: दिल्ली प्रीमियर लीग के ‘पर्पल कैप’ विजेता अंशुमान हुड्डा की अद्भुत कहानी

इंजीनियरिंग से क्रिकेट के मैदान तक: दिल्ली प्रीमियर लीग के 'पर्पल कैप' विजेता अंशुमान हुड्डा की अद्भुत कहानी

कॉर्पोरेट जीवन और क्रिकेट का अनोखा संगम

दिल्ली प्रीमियर लीग (DPL) के मंच ने भारतीय क्रिकेट को एक ऐसा सितारा दिया है, जिसकी कहानी किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं है। अंशुमान हुड्डा, जो दिन में एक बहुराष्ट्रीय कंपनी में सॉफ्टवेयर इंजीनियर के रूप में काम करते हैं, आज दिल्ली के क्रिकेट गलियारों में चर्चा का विषय बने हुए हैं। दिल्ली टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी (DTU) से स्नातक अंशुमान का सफर पारंपरिक क्रिकेटरों से बिल्कुल अलग रहा है। उन्होंने कभी भी आयु-वर्ग (age-group) क्रिकेट नहीं खेला, बल्कि वे एक राष्ट्रीय स्तर के रोलर स्केटर रहे हैं।

संघर्ष और हार न मानने का जज्बा

अंशुमान के लिए क्रिकेट का रास्ता फूलों की सेज नहीं था। अंडर-23 ट्रायल में दो बार मिली असफलता ने उन्हें खेल छोड़ने पर मजबूर कर दिया था। thetargetnews.in की विशेष रिपोर्ट के अनुसार, एक समय ऐसा भी आया था जब उन्होंने अपनी कॉर्पोरेट नौकरी को ही अपना भविष्य मान लिया था। हालांकि, उनकी मेहनत और जुनून ने उन्हें मैदान पर वापस खींच लिया। DPL में उनकी गेंदबाजी ने न केवल दर्शकों का दिल जीता, बल्कि चयनकर्ताओं का ध्यान भी अपनी ओर आकर्षित किया है।

“अंशुमान के पास प्राकृतिक गति है। वह अभी 140 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से गेंदबाजी कर रहे हैं, लेकिन उनमें 150 किमी प्रति घंटे की रफ्तार छूने की पूरी क्षमता है,” उनके कोच हरीश डागर ने एक साक्षात्कार में कहा।

मुख्य बिंदु और भविष्य की राह

  • अंशुमान हुड्डा DTU के पूर्व छात्र हैं और एक मल्टीनेशनल कंपनी में कार्यरत हैं।
  • वे पूर्व में एक राष्ट्रीय स्तर के रोलर स्केटर रह चुके हैं।
  • DPL में शानदार प्रदर्शन करते हुए उन्होंने ‘पर्पल कैप’ अपने नाम की है।
  • उनकी गेंदबाजी की गति 140 किमी प्रति घंटे से अधिक है, जो उन्हें भविष्य का एक बेहतरीन तेज गेंदबाज बनाती है।

अंशुमान की यह यात्रा उन हजारों युवाओं के लिए प्रेरणा है जो अपने सपनों और करियर के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रहे हैं। यह साबित करता है कि यदि इरादे मजबूत हों, तो कॉर्पोरेट डेस्क से अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के मैदान तक का सफर तय करना असंभव नहीं है।

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