टारगेट न्यूज़ ब्यूरो: दिल्ली की राजनीति में एक नया विवाद तब खड़ा हो गया जब आम आदमी पार्टी (AAP) ने दावा किया कि मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और उनके परिवार के सदस्यों के नाम दिल्ली की मतदाता सूची से गायब हैं। पार्टी ने इसे एक सोची-समझी साजिश करार देते हुए चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाए हैं।
क्या है पूरा मामला?
आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने आरोप लगाया है कि अरविंद केजरीवाल, उनकी पत्नी सुनीता केजरीवाल और अन्य परिजनों के नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए हैं। पार्टी का कहना है कि यह केवल एक तकनीकी चूक नहीं है, बल्कि इसके पीछे राजनीतिक मंशा छिपी हो सकती है। AAP के प्रवक्ता ने तंज कसते हुए पूछा, ‘क्या यह सब ‘सुप्रीम लॉर्ड’ को खुश करने के लिए किया जा रहा है?’
AAP का तीखा हमला
पार्टी ने आधिकारिक बयान में कहा है कि एक मौजूदा मुख्यमंत्री का नाम मतदाता सूची से गायब होना लोकतंत्र के लिए खतरनाक संकेत है। यह न केवल प्रशासनिक विफलता है, बल्कि यह दर्शाता है कि व्यवस्था के भीतर किस तरह की धांधली की जा रही है।
प्रमुख बिंदु
- अरविंद केजरीवाल और उनके परिवार के नाम मतदाता सूची से नदारद पाए गए।
- आम आदमी पार्टी ने इसे लोकतंत्र पर हमला बताया।
- पार्टी ने चुनाव आयोग से तत्काल जांच और सुधार की मांग की है।
- AAP ने इसे राजनीतिक प्रतिशोध की कार्रवाई करार दिया है।
चुनाव आयोग की भूमिका पर सवाल
आम आदमी पार्टी ने चुनाव आयोग से इस मामले में जवाबदेही तय करने की मांग की है। पार्टी का तर्क है कि यदि दिल्ली के मुख्यमंत्री के साथ ऐसा हो सकता है, तो आम नागरिकों की सूची की सुरक्षा पर क्या भरोसा किया जा सकता है। फिलहाल, चुनाव आयोग की ओर से इस मामले पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन राजनीतिक गलियारों में यह मुद्दा गरमा गया है।



















