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चंबा में पुल निर्माण पर बड़ा सवाल! रिकॉर्ड में गड़बड़ी, ठेकेदार को नोटिस जारी

धर्मशाला । राजवीर दीक्षित

(Major questions raised over bridge construction in Chamba! Discrepancies in records; notice issued to the contractor) पुल निर्माण में लगे एक ठेकेदार को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। यह कार्रवाई नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) और लोक निर्माण विभाग (PWD) के रिकॉर्ड में अंतर सामने आने के बाद की गई है। अब ठेकेदार को विभाग के समक्ष अपना पक्ष रखना होगा, जबकि संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर लाइसेंस आवेदन खारिज किया जा सकता है।

चंबा के जिला श्रम अधिकारी अनुराग शर्मा ने ऊना के दौलतपुर चौक स्थित M/s ओम प्रकाश शर्मा एंड संस को नोटिस जारी किया है। विभाग ने संबंधित फर्म से स्पष्टीकरण मांगते हुए पूछा है कि हिमाचल प्रदेश कॉन्ट्रैक्ट लेबर रूल्स, 1974 के प्रावधानों के तहत उसके लाइसेंस आवेदन को खारिज क्यों न किया जाए।

आखिर आवेदन की जांच के दौरान ऐसा क्या सामने आया, जिसके बाद विभाग को नोटिस जारी करना पड़ा?

जानकारी के अनुसार, संबंधित फर्म ने 19 अगस्त को कॉन्ट्रैक्ट लेबर (रेगुलेशन एंड एबोलिशन) एक्ट, 1970 के तहत भट्टी नाला पुल निर्माण स्थल पर 20 कॉन्ट्रैक्ट वर्कर लगाने के लिए लाइसेंस हासिल करने हेतु ऑनलाइन आवेदन किया था। आवेदन में काम की अवधि 1 जनवरी से 31 दिसंबर, 2026 तक दर्शाई गई थी। वहीं, मुख्य नियोक्ता (प्रिंसिपल एम्प्लॉयर) के रूप में चंबा स्थित PWD डिवीजन के नेशनल हाईवे के अधिशासी अभियंता का नाम दर्ज किया गया था।

आवेदन की जांच आगे बढ़ी तो विभाग ने रिकॉर्ड का सत्यापन शुरू किया।

लाइसेंस जारी करने की प्रक्रिया के तहत संबंधित अधिकारी ने 25 सितंबर को NHAI के प्रोजेक्ट इम्प्लीमेंटेशन यूनिट (PIU), चंबा के प्रोजेक्ट डायरेक्टर से मामले से जुड़ी जानकारी मांगी। इसके बाद 5 अक्टूबर को चंबा स्थित PWD डिवीजन के नेशनल हाईवे के अधिशासी अभियंता के कार्यालय का निरीक्षण किया गया। इस दौरान कार्यालय में उपलब्ध दस्तावेजों और रिकॉर्ड की जांच की गई, ताकि आवेदन में दी गई जानकारी का सत्यापन किया जा सके।

NHAI और PWD के रिकॉर्ड का मिलान करने के बाद सामने आईं कुछ कमियां।

दस्तावेजों की जांच और दोनों विभागों के रिकॉर्ड की तुलना के बाद श्रम विभाग ने कुछ कमियां पाए जाने की बात कही। इसके बाद संबंधित ठेकेदार को कारण बताओ नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया। नोटिस में स्पष्ट रूप से पूछा गया है कि उपलब्ध रिकॉर्ड और आवेदन से जुड़ी आपत्तियों के आधार पर फर्म के लाइसेंस आवेदन को क्यों न अस्वीकार कर दिया जाए।

यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि संबंधित पुल के अधिकार क्षेत्र को लेकर ठेकेदार की ओर से अलग स्थिति बताई गई है। हालांकि, रिकॉर्ड में सामने आई कमियों और ठेकेदार के स्पष्टीकरण पर अंतिम निर्णय विभागीय सुनवाई के बाद ही स्पष्ट होगा।

16 अक्टूबर को होगी सुनवाई, जवाब नहीं दिया तो हो सकती है एकतरफा कार्रवाई।

जिला श्रम अधिकारी ने ठेकेदार को 16 अक्टूबर को अपने समक्ष पेश होने के निर्देश दिए हैं। विभाग ने उसे अपना पक्ष रखने और नोटिस में उठाई गई आपत्तियों पर स्पष्टीकरण देने का अवसर दिया है। साथ ही चेतावनी दी गई है कि यदि संबंधित फर्म निर्धारित तारीख पर पेश नहीं होती या उसका जवाब संतोषजनक नहीं पाया जाता, तो उसके खिलाफ एकतरफा कार्रवाई की जा सकती है। ऐसी स्थिति में लाइसेंस के लिए किया गया आवेदन भी खारिज किया जा सकता है।

जिला श्रम अधिकारी अनुराग शर्मा ने बताया कि निर्माण एजेंसी की ओर से जमा किए गए दस्तावेजों और उपलब्ध कराई गई जानकारी की बारीकी से जांच की गई है। उन्होंने कहा कि जब NHAI और PWD के रिकॉर्ड का मिलान किया गया, तो उसमें कुछ कमियां सामने आईं। इसी के चलते ठेकेदार को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।

अनुराग शर्मा ने आगे कहा कि यदि ठेकेदार निर्धारित सुनवाई के दौरान संतोषजनक जवाब देने में विफल रहता है, तो उसके लाइसेंस आवेदन को खारिज कर दिया जाएगा। इसके बाद नियमों के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी। यानी फिलहाल विभाग ने ठेकेदार से जवाब मांगा है और अंतिम निर्णय उसके स्पष्टीकरण तथा संबंधित रिकॉर्ड की जांच के आधार पर लिया जाएगा।

उधर, ठेकेदार ने बताया अधिकार क्षेत्र में बदलाव का मामला।

वहीं, M/s ओम प्रकाश शर्मा एंड संस के पार्टनर बृज किशोर ने इस मामले में अपना पक्ष रखते हुए कहा कि जब फर्म ने लाइसेंस के लिए आवेदन किया था, उस समय भट्टी नाला पुल नेशनल हाईवे, PWD डिवीजन, चंबा के अधिकार क्षेत्र में आता था। उनके मुताबिक, अब यह पुल NHAI के अधिकार क्षेत्र में आ गया है।

बृज किशोर ने कहा कि उनकी फर्म कारण बताओ नोटिस का जवाब देगी। इस बयान के बाद अब मामले में ठेकेदार की ओर से दिए जाने वाले स्पष्टीकरण और श्रम विभाग की जांच पर नजर रहेगी।

फिलहाल, NHAI और PWD के रिकॉर्ड में अंतर के चलते लाइसेंस आवेदन पर सवाल उठे हैं। अब 16 अक्टूबर को होने वाली सुनवाई अहम मानी जा रही है। ठेकेदार के जवाब के बाद ही स्पष्ट होगा कि विभाग उसकी दलीलों से संतुष्ट होता है या लाइसेंस आवेदन खारिज करने की दिशा में आगे बढ़ता है। अभी तक नोटिस जारी हुआ है, किसी अनियमितता पर अंतिम निर्णय सामने नहीं आया है।

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