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पंजाब सरकार के बंद पड़े PNFC प्लांट की 106 एकड़ से अधिक गायब जमीन का Nangal में चला पता

पंजाब सरकार के बंद पड़े PNFC प्लांट की 106 एकड़ से अधिक गायब जमीन का Nangal में चला पता

टारगेट न्यूज़ संवाददाता: पंजाब सरकार के अंतर्गत आने वाले और लंबे समय से बंद पड़े पंजाब नेशनल फर्टिलाइजर्स एंड केमिकल्स लिमिटेड (PNFC) के नांगल स्थित संयंत्र की 106 एकड़ से अधिक गायब जमीन का आखिरकार पता चल गया है। राजस्व अधिकारियों द्वारा की गई हालिया गहन जांच और प्रशासनिक बैठकों के बाद इस बहुमूल्य संपत्ति की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो गई है। सरकारी दस्तावेजों के अनुसार, इस जमीन की कीमत बाजार दरों के हिसाब से कई करोड़ रुपये आंकी जा रही है, जो राज्य के खजाने और औद्योगिक पुनरुद्धार के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है।

ताज़ा अपडेट्स और मुख्य बिंदु (Fresh Updates)

  • नांगल के उप-मंडलीय मजिस्ट्रेट (SDM) सचिन पाठक के नेतृत्व में राजस्व विभाग की टीम ने 106 एकड़ से अधिक गायब जमीन का पता लगाया है।
  • जांच में यह बात सामने आई है कि इस जमीन का एक बड़ा हिस्सा प्राइमो केमिकल्स (पूर्व में पंजाब एल्काइल्स एंड केमिकल्स लिमिटेड) के कब्जे में है।
  • पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय द्वारा नियुक्त आधिकारिक लिक्विडेटर (Official Liquidator) की आपत्तियों के बाद यह पूरा मामला प्रकाश में आया था।
  • नांगल के तहसीलदार सुमित सिंह ढिल्लों की अध्यक्षता वाली छह सदस्यीय समिति ने इस भूखंड की संयुक्त पैमाइश और निरीक्षण किया है।

विस्तार से समझें पूरा मामला (In-Depth Explanation)

इस पूरे प्रकरण की शुरुआत साल 2025 में हुई, जब पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय द्वारा नियुक्त आधिकारिक लिक्विडेटर ने राजस्व रिकॉर्ड (जमाबंदियों) और जमीन की भौतिक स्थिति के बीच भारी विसंगतियों को चिन्हित किया। लिक्विडेटर ने इस संबंध में प्रशासनिक अधिकारियों को पत्र लिखकर अवगत कराया था कि साल 2008-09 की जमाबंदी में दर्ज कंपनी की कुल भूमि का मिलान बाद के रिकॉर्ड और जमीन पर मौजूद वास्तविक स्थिति से नहीं हो रहा है। करीब 15.25 एकड़ जमीन का अंतर सामने आने के बाद प्रशासनिक स्तर पर हड़कंप मच गया था, क्योंकि सरकारी दरों के अनुसार भी इस जमीन का मूल्यांकन प्रति एकड़ तीन करोड़ रुपये से अधिक बैठता है।

इस मामले की गंभीरता को देखते हुए स्थानीय प्रशासन ने एक उच्च स्तरीय कमेटी का गठन किया। छह सदस्यीय इस समिति ने 15 सितंबर को कड़े सुरक्षा प्रबंधों और दस्तावेजों की जांच के बीच संयुक्त निरीक्षण और पैमाइश पूरी की। 17 सितंबर को आधिकारिक लिक्विडेटर को सौंपी गई अपनी रिपोर्ट में एसडीएम नांगल ने स्पष्ट किया कि सड़क परियोजना के लिए अधिग्रहित भूमि को हटाने और राजस्व रिकॉर्ड की त्रुटियों को सुधारने के बाद, पीएनएफसी के पास कुल 854 कनाल और 3 मर्च यानी 106.89 एकड़ जमीन वैध रूप से दर्ज है।

जांच रिपोर्ट के अनुसार, राज्य सरकार ने मूल रूप से अजोली और मैदा माजरा गांवों में पीएनएफसी को 891 कनाल और 18 मरला (यानी 111.48 एकड़) भूमि सौंपी थी। इसमें से 36 कनाल और 15 मरला भूमि केंद्र सरकार द्वारा एनएच-503 पर अजोली मोड़ पर रोड ओवरब्रिज के निर्माण के लिए अधिग्रहित कर ली गई थी। इस प्रकार अधिग्रहण के बाद कंपनी की शुद्ध भूमि 855 कनाल 3 मरला बैठती है। नए सर्वेक्षण में यह बात सामने आई कि 780 कनाल और 13 मरला (97.41 एकड़) भूमि कारखाने की चारदीवारी के भीतर आती है, जबकि शेष 9.31 एकड़ जमीन दो अलग-अलग पट्टियों के रूप में चारदीवारी के बाहर स्थित है।

सामाजिक व आर्थिक प्रभाव (Social & Economic Impact)

पूर्वी पट्टी चारदीवारी और नेशनल फर्टिलाइजर्स लिमिटेड के बिजली के खंभों के बीच स्थित है, जबकि पश्चिमी पट्टी कारखाने की दीवार और पड़ोसी औद्योगिक भूखंडों के बीच फैली हुई है। इस पश्चिमी पट्टी में प्राइमो केमिकल्स लिमिटेड द्वारा इस्तेमाल किया जाने वाला एक अप्रोच रोड भी शामिल है। साल 1986 में पीएनएफसी और प्राइमो केमिकल्स के पूर्ववर्ती के बीच हुए एक समन्वय समझौते में भूमि के आदान-प्रदान और रास्ते के इस्तेमाल का प्रावधान था, लेकिन यह समझौता कभी पंजीकृत नहीं हुआ और न ही राजस्व रिकॉर्ड में इसका इंदराज किया गया। उच्च न्यायालय द्वारा 28 अगस्त 2001 को पीएनएफसी के बंद होने और इसके समाशोधन (Liquidation) के आदेश दिए गए थे, लेकिन भूमि के अधूरे रिकॉर्ड और विसंगतियों के कारण यह मामला दो दशकों से अधिक समय से लटका हुआ था। इस ताज़ा रिपोर्ट के स्वीकार किए जाने से बंद पड़ी इकाई की परिसंपत्तियों के निस्तारण का रास्ता साफ हो गया है, जिसका सीधा असर क्षेत्र की आर्थिक गतिशीलता पर पड़ेगा।

स्थानीय प्रशासन और राजस्व विभाग के संयुक्त प्रयासों से वर्षों पुरानी भूमि संबंधी उलझनों को सुलझा लिया गया है, जिससे अब उच्च न्यायालय के निर्देशों के तहत आगे की कानूनी और प्रशासनिक कार्रवाई तेजी से पूरी की जा सकेगी।

संक्षिप्त निष्कर्ष (Summary & Outlook)

नांगल में पीएनएफसी की खोई हुई जमीन का पता चलना पंजाब में औद्योगिक संपत्तियों के उचित प्रबंधन और सरकारी परिसंपत्तियों की सुरक्षा की दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर साबित हुआ है। लंबे समय से चली आ रही प्रशासनिक अड़चनों के दूर होने से न केवल कानूनी पेंच सुलझेंगे, बल्कि राज्य सरकार के वित्तीय हितों की रक्षा भी सुनिश्चित होगी। आने वाले दिनों में इस रिपोर्ट के आधार पर लिक्विडेशन प्रक्रिया में तेजी आने की पूरी उम्मीद है।

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