टारगेट न्यूज़ ब्यूरो: काउंसिल फॉर लेदर एक्सपोर्ट्स (CLE) के उपाध्यक्ष ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण बयान देते हुए कहा है कि भारत और वियतनाम के बीच फुटवियर यानी जूता उद्योग में सहयोग की अपार संभावनाएं हैं। दोनों देशों के बीच तकनीकी आदान-प्रदान और आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने से वैश्विक बाजार में भारतीय उत्पादों की पैठ और अधिक गहरी हो सकती है।
सहयोग के नए आयाम
वैश्विक फुटवियर बाजार में वियतनाम एक प्रमुख खिलाड़ी बनकर उभरा है। भारतीय उद्योग जगत का मानना है कि वियतनाम की विनिर्माण क्षमता और भारत की कच्चे माल की उपलब्धता तथा कुशल कारीगरी मिलकर एक ‘विन-विन’ स्थिति पैदा कर सकते हैं। CLE के अनुसार, यह साझेदारी न केवल निर्यात को बढ़ावा देगी बल्कि ‘मेक इन इंडिया’ अभियान को भी नई गति प्रदान करेगी।
विशेषज्ञों की राय
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि हम वियतनाम के साथ मिलकर डिजाइन और गुणवत्ता नियंत्रण पर ध्यान केंद्रित करें, तो भारतीय फुटवियर ब्रांड अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी एक अलग पहचान बना सकते हैं।
इस साझेदारी के मुख्य लाभ:
- तकनीकी नवाचार और आधुनिक मशीनों का साझा उपयोग।
- आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) में सुधार और लागत में कमी।
- वैश्विक बाजारों में भारतीय जूतों की प्रतिस्पर्धात्मकता में वृद्धि।
- कौशल विकास और प्रशिक्षण कार्यक्रमों का आदान-प्रदान।
आने वाले समय में दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार वार्ता में फुटवियर सेक्टर को प्राथमिकता मिलने की उम्मीद है, जिससे उत्तर प्रदेश के आगरा और कानपुर जैसे प्रमुख जूता निर्माण केंद्रों को भी सीधा लाभ मिल सकता है।



















