Home BJP Punjab BJP में अंदरूनी बगावत! 6 जिला अध्यक्ष हटाए गए, दिल्ली तलब हुए बड़े नेता—चुनाव से पहले बढ़ी बेचैनी

Punjab BJP में अंदरूनी बगावत! 6 जिला अध्यक्ष हटाए गए, दिल्ली तलब हुए बड़े नेता—चुनाव से पहले बढ़ी बेचैनी

चंडीगढ़ । राजवीर दीक्षित

Internal Rebellion in Punjab BJP! 6 District Presidents Removed, Top Leaders Summoned to Delhi—Tensions Rise Ahead of Elections पंजाब कांग्रेस में चल रही अंदरूनी खींचतान के बीच अब पंजाब बीजेपी में भी संगठन को लेकर असंतोष खुलकर सामने आने लगा है। पार्टी ने हाल ही में होशियारपुर, फरीदकोट, खन्ना, मुक्तसर और संगरूर समेत छह जिलों के जिला अध्यक्ष बदले थे, लेकिन नियुक्तियों के तुरंत बाद ही पार्टी के भीतर विरोध के स्वर तेज हो गए।हालात की गंभीरता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन ने शनिवार को पंजाब बीजेपी के नवनियुक्त प्रदेश अध्यक्ष केवल ढिल्लों और RSS के राज्य संगठन सचिव मंत्री श्रीनिवासुलु को तत्काल दिल्ली बुलाया। दोनों नेताओं के साथ बैठक में संगठन में पैदा हुए असंतोष और आगे की रणनीति पर चर्चा हुई तथा स्थिति को सुधारने की दिशा में कदम उठाने को कहा गया। हालांकि बीजेपी प्रवक्ता विनीत जोशी ने स्थिति को सामान्य बताते हुए कहा कि “सब चंगा सी”, लेकिन पार्टी के अंदर से सामने आ रही नाराजगी कुछ और कहानी बयां कर रही है।
6 जिला अध्यक्षों को हटाने से शुरू हुआ विवाद
बीजेपी ने होशियारपुर, संगरूर, खन्ना, मुक्तसर और फरीदकोट समेत छह जिलों के जिला अध्यक्षों को बदल दिया। इसके बाद कई पुराने पार्टी कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों में नाराजगी देखने को मिली। फरीदकोट में तो विरोध इतना बढ़ गया कि एक मंडल अध्यक्ष समेत करीब 10 पार्टी पदाधिकारियों ने इस्तीफा दे दिया। इसके बाद संगठन में अंदरूनी मतभेद खुलकर सामने आ गए।
आखिर विवाद शुरू कैसे हुआ
सूत्रों के मुताबिक पंजाब बीजेपी में संगठनात्मक बदलाव की प्रक्रिया के दौरान बीजेपी के राज्यसभा सांसद सतीश पूनिया को पंजाब में संगठन के पुनर्गठन की जिम्मेदारी दी गई थी। उन्होंने प्रदेश संगठन से नए पदाधिकारियों की संभावित सूची मांगी। राज्य इकाई की ओर से सूची दिल्ली भेजी गई, लेकिन सूत्रों का दावा है कि दिल्ली स्तर पर इसमें कुछ नाम जोड़े गए और कुछ नाम हटा दिए गए। यही बदलाव पार्टी के पुराने कार्यकर्ताओं के लिए नाराजगी की वजह बन गया। कई ऐसे कार्यकर्ता जिन्होंने वर्षों तक पार्टी के लिए काम किया था, जब उन्हें नई सूची में जगह नहीं मिली तो उन्होंने इसका विरोध शुरू कर दिया। पार्टी के पुराने नेताओं के बीच यह भावना पैदा हुई कि लंबे समय से संगठन के लिए काम करने वाले लोगों को किनारे किया जा रहा है।
होशियारपुर से संगरूर तक नाराजगी
होशियारपुर के वरिष्ठ नेता तीक्ष्ण सूद ने भी सार्वजनिक तौर पर अपनी नाराजगी जाहिर की और प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए अपनी बात रखी। वहीं संगरूर में जिला अध्यक्ष पद से हटाए गए पार्टी नेता मनिंदर कपियल ने कहा कि वह करीब दो दशक से बीजेपी से जुड़े हैं। उनका आरोप था कि पार्टी के पुराने नेताओं को धीरे-धीरे राजनीतिक रूप से खत्म किया जा रहा है और मौजूदा नेतृत्व कथित तौर पर बड़े जमींदारों और अमीर लोगों को ज्यादा महत्व दे रहा है। तीक्ष्ण सूद ने भी आरोप लगाया कि जो लोग कभी सार्वजनिक रूप से बीजेपी और उसके नेताओं की आलोचना करते थे, उन्हें अब पार्टी में जगह और महत्वपूर्ण पद मिल रहे हैं, जबकि वर्षों तक संगठन के लिए काम करने वाले पुराने कार्यकर्ताओं की अनदेखी हो रही है।
लुधियाना से क्यों उठा विवाद
पार्टी के अंदर असंतोष की एक और वजह लुधियाना से जुड़े संगठनात्मक पदों को बताया जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक, बीजेपी के पांच महासचिवों में से तीन लुधियाना से हैं, जबकि 12 उपाध्यक्षों में से सात ऐसे लोगों को जगह दी गई है जिन्हें पार्टी के कुछ कार्यकर्ता बाहरी मान रहे हैं। यही कारण है कि संगठन में यह सवाल उठने लगा कि पंजाब बीजेपी के नए ढांचे में स्थानीय और पुराने कार्यकर्ताओं को कितना प्रतिनिधित्व मिला है।
चुनाव से पहले BJP के सामने बड़ी चुनौती
पंजाब में अगले कुछ महीनों में चुनावी माहौल बनने वाला है। ऐसे समय में संगठन के भीतर इस तरह की नाराजगी बीजेपी नेतृत्व के लिए चिंता का विषय बन गई है।
यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से शिरोमणि अकाली दल के साथ गठबंधन को लेकर नए सिरे से प्रयास किए जाने की चर्चा है। ऐसे में पंजाब बीजेपी के भीतर उठता असंतोष पार्टी की चुनावी रणनीति के लिए अहम माना जा रहा है।
अब डैमेज कंट्रोल की कोशिश
विवाद बढ़ने के बाद प्रदेश अध्यक्ष केवल ढिल्लों और RSS के राज्य संगठन सचिव मंत्री श्रीनिवासुलु ने नाराज कार्यकर्ताओं को शांत करने की कोशिश की है। दिल्ली में हुई बैठक के बाद नेताओं की ओर से कहा गया कि पंजाब से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई, जिनमें कृषि, युवा, सीमा सुरक्षा और शहरी विकास प्रमुख हैं।
केवल ढिल्लों ने कहा कि आने वाले दिनों में हर जिले, हर मंडल और हर गांव के स्तर पर मजबूत संगठनात्मक टीमें तैयार की जाएंगी। उनका दावा है कि इसका सकारात्मक असर आगामी चुनावों में देखने को मिलेगा। फिलहाल बीजेपी के सामने सबसे बड़ी चुनौती यही है कि पुराने कार्यकर्ताओं की नाराजगी को कैसे शांत किया जाए और नए संगठनात्मक ढांचे को चुनाव से पहले जमीन पर कैसे मजबूत किया जाए। कांग्रेस के भीतर चल रही गुटबाजी के बीच बीजेपी में उठे ये विरोध के स्वर पंजाब की आगामी राजनीति के लिए निश्चित तौर पर महत्वपूर्ण संकेत हैं।
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