thetargetnews.in ब्यूरो: पंजाब के प्रमुख शहर का बस स्टैंड, जो रोजाना हजारों यात्रियों की आवाजाही का केंद्र है, आज खुद अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है। बस स्टैंड की मुख्य इमारत की छत और दीवारों पर उग आए पीपल और बरगद के पेड़ न केवल प्रशासन की लापरवाही की पोल खोल रहे हैं, बल्कि यह एक गंभीर संरचनात्मक खतरे की ओर भी इशारा कर रहे हैं।
संरचनात्मक जोखिम और सुरक्षा पर सवाल
बस स्टैंड की पुरानी होती इमारतों की छतों पर उग आई वनस्पति ने कंक्रीट की पकड़ को कमजोर करना शुरू कर दिया है। जानकारों का कहना है कि पीपल की जड़ें बहुत तेजी से फैलती हैं, जो इमारत की नींव और पिलर्स के लिए घातक साबित हो सकती हैं। यदि समय रहते इन पेड़ों को नहीं हटाया गया, तो यह बस स्टैंड कभी भी किसी बड़े हादसे का गवाह बन सकता है।
स्थानीय प्रशासन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, ‘हम नियमित रखरखाव के लिए बजट का इंतजार कर रहे हैं। हालांकि, पेड़ों को हटाने का कार्य प्राथमिकता सूची में है, लेकिन तकनीकी विशेषज्ञों की कमी के कारण इसमें देरी हो रही है।’
क्यों उपेक्षित है बस स्टैंड का रखरखाव?
बस स्टैंड की इस दयनीय स्थिति के पीछे कई कारण जिम्मेदार हैं, जिन्हें नजरअंदाज करना अब भारी पड़ सकता है:
- नियमित सफाई का अभाव: छत और कोनों की सफाई के लिए कोई समर्पित टीम तैनात नहीं है।
- जल निकासी की समस्या: छत पर पानी जमा होने से बीजों का अंकुरण आसान हो गया है।
- बजट का आवंटन: रखरखाव के लिए मिलने वाली राशि का सही इस्तेमाल न होना।
- निगरानी की कमी: संबंधित विभाग द्वारा समय-समय पर स्ट्रक्चरल ऑडिट न करना।
यात्रियों में डर का माहौल
रोजाना सफर करने वाले यात्रियों का कहना है कि वे बस स्टैंड के नीचे खड़े होने से भी डरते हैं। छत से गिरते पत्थर और पेड़ों की बढ़ती टहनियां किसी भी समय किसी के सिर पर गिर सकती हैं। स्थानीय लोगों ने मांग की है कि प्रशासन जल्द से जल्द इस पर संज्ञान ले और बस स्टैंड का कायाकल्प करे, ताकि किसी अनहोनी को टाला जा सके।



















