Home India श्रीलंका को मदद देना हमारा कर्तव्य, उपकार नहीं: राष्ट्रपति दिसानायके से बोले...

श्रीलंका को मदद देना हमारा कर्तव्य, उपकार नहीं: राष्ट्रपति दिसानायके से बोले रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह

श्रीलंका को मदद देना हमारा कर्तव्य, उपकार नहीं: राष्ट्रपति दिसानायके से बोले रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह

भारत और श्रीलंका के बीच प्रगाढ़ होते रक्षा संबंध

भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने हाल ही में श्रीलंका के राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके के साथ एक उच्च-स्तरीय बैठक की, जिसमें उन्होंने स्पष्ट किया कि श्रीलंका को संकट के समय सहायता प्रदान करना भारत के लिए कोई उपकार नहीं, बल्कि एक ‘जिम्मेदारी’ है। टारगेट न्यूज़ की विशेष रिपोर्ट के अनुसार, रक्षा मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि भारत ‘प्रथम उत्तरदाता’ (First Responder) के रूप में अपने पड़ोसी देशों की सुरक्षा और स्थिरता के लिए हमेशा प्रतिबद्ध है।

रणनीतिक साझेदारी और सुरक्षा सहयोग

बैठक के दौरान दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय रक्षा सहयोग को और अधिक सुदृढ़ करने पर चर्चा की। रक्षा मंत्री ने कहा कि भारत और श्रीलंका की सुरक्षा एक-दूसरे से जुड़ी हुई है और हिंद महासागर क्षेत्र में शांति बनाए रखने के लिए दोनों देशों का समन्वय अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने श्रीलंका के आर्थिक और सुरक्षा संबंधी चुनौतियों के दौर में भारत द्वारा दिए गए सहयोग का जिक्र करते हुए कहा कि भारत हमेशा एक भरोसेमंद मित्र की तरह खड़ा रहा है।

टारगेट न्यूज़ संवाददाता के अनुसार, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत की ‘नेबरहुड फर्स्ट’ नीति के तहत श्रीलंका के साथ हमारे संबंध केवल कूटनीतिक नहीं, बल्कि ऐतिहासिक और सांस्कृतिक रूप से गहरे हैं।

मुख्य बिंदु और भविष्य की दिशा

  • भारत श्रीलंका को एक रणनीतिक भागीदार के रूप में देखता है।
  • हिंद महासागर में सुरक्षा और स्थिरता के लिए संयुक्त प्रयास जारी रहेंगे।
  • रक्षा मंत्री ने श्रीलंका के विकास कार्यों में भारत के पूर्ण समर्थन का आश्वासन दिया।
  • दोनों देशों के बीच रक्षा प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण पर विशेष जोर दिया गया।

यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब श्रीलंका अपनी अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए संघर्ष कर रहा है और भारत उसे हर संभव तकनीकी और वित्तीय सहायता प्रदान कर रहा है। रक्षा मंत्री का यह बयान न केवल श्रीलंका के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को दर्शाता है, बल्कि यह भी स्पष्ट करता है कि भारत हिंद महासागर क्षेत्र में अपनी भूमिका को लेकर अत्यंत गंभीर है।

Translate »
error: Content is protected !!