ब्रिटिश कंपनी के बाद भारतीय बायोटेक कंपनी की वैक्सीन को लेकर अहम खबर, आब्जर्वेशनल स्टडी में इस तरह का दावा, पढ़ें

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The Target News

नई दिल्ली । राजवीर दीक्षित

कोरोना महामारी के वक्त इससे बचाव के लिए देश में बड़े पैमाने पर लोगों ने कोविशील्ड और कोवैक्सीन टीके लगवाए थे।

लेकिन, धीरे-धीरे अब इन टीकों के साइड इफेक्ट की बात सामने आने लगी है।

कोविशील्ड को विकसित करने वाली ब्रिटिश कंपनी एस्ट्राजेनिका ने पिछले दिनों वहां की एक अदालत में स्वीकार किया था कि उसके टीके से कुछ लोगों में गंभीर बीमारी हो सकती है।

इसी तरह अपने देश में विकसित भारत बायोटेक कंपनी की वैक्सीन कौवेक्सीन के साइड इफेक्ट को लेकर एक रिपोर्ट आई है।

इसमें दावा किया गया है कि इस वैक्सीन को लगवाने के करीब एक साल बाद तक ठीकठाक संख्या में लोगों में इसके साइड इफेक्ट देखे गए।

इससे सबसे ज्यादा प्रभावित किशोर लड़कियां थीं। कुछ साइड इफेक्ट बेहद गंभीर किस्म के थे।

एक रिपोर्ट के मुताबिक इस वैक्सीन के साइड इफेक्ट को लेकर एक आब्जर्वेशनल स्टडी की गई।

इसमें टीका लगवाने वाले एक तिहाई लोगों में एडवर्स इवेंट्स आफ स्पेशल इंट्रेस्ट अर्थात एआईएसआई पाया गया।

यह स्टडी रिपोर्ट स्प्रिंगर लिंक जर्नल में प्रकाशित हुई है।

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बीएचयू में हुई स्टडी

यह स्टडी बनारस हिंदू विश्वविद्यालय की संखा शुभ्रा चक्रबर्ती और उनकी टीम ने किया है।

रिपोर्ट के मुताबिक टीका लगवाने वाले अधिकतर लोगों में एक साल तक साइड इफेक्ट देखा गया।

स्टडी में 1024 लोगों को शामिल किया गया। इसमें 635 किशोर और 391 युवा थे।

इन सभी से टीका लगवाने के एक साल बात तक फालोअप चेकअप के लिए संपर्क किया गया।

स्टडी में 304 किशोरों यानी करीब 48 प्रतिशत में वायरल अपर रेस्पेरेट्री ट्रैक इन्फेक्शन देखा गया। ऐसी स्थिति 124 यानी 42.6 युवाओं में भी दिखी।

इसके अलावा 10.5 प्रतिशत किशोरों में न्यू आनसेट स्कीन एंड सबकुटैनियस डिसआर्डर, 10.2 जनरल डिसआर्डर यानी आम परेशानी, 4.7 प्रतिशत में नर्वस सिस्टम डिसआर्डर यानी नसों से जुड़ी परेशानी पाई गई।

इसी तरह 8.9 प्रतिशत युवा लोगों में आम परेशानी, 5.8 प्रतिशत में मुस्कुलोस्केलेटल डिसआर्डर यानी मांसपेशियों, नसों, जोड़ों से जुड़ी परेशानी और 5.5 में नर्वस सिस्टम से जुड़ी परेशानी देखी गई।

रिपोर्ट के मुताबिक कोवैक्सीन का साइड इफेक्ट युवा महिलाओं में भी देखा गया।

4.6 प्रतिशत महिलाओं में पीरियड से जुड़ी परेशानी सामने आई। 2.7 प्रतिशत में ओकुलर यानी आंख से जुड़ी दिक्कत दिखी। 0.6 प्रतिशत में हाइपोथारोइडिज्म पाया गया।

1 प्रतिशत लोगों में गंभीर साइड इफेक्ट

जहां तक गंभीर साइड इफेक्ट की बात है त यह करीब एक प्रतिशत लोगों में पाया गया।

0.3 प्रतिशत (यानी 300 में से एक व्यक्ति) में स्ट्राक की दिक्कत 0.1 प्रतिशत में गुईलैइन-बैरे सिंड्रोम पाया गया।

स्टडी में कहा गया है कि इस वैक्सीन को लगवाने के बाद युवा-किशोर महिलाओं में थायरायड बीमारी का प्रभाव ज्यादा बढ़ गया।

कई किशोरियों में थायरायड का लेवल कई गुना बढ़ गया।

एक साल बाद भी असर

चिंताजनक बात यह है कि वैक्सीन लगवाने के एक साल बाद जब इन लोगों से संपर्क किया गया तो इनमें से अधिकतर लोगों में ये बीमारियां मौजूद थीं।

इसमें यह भी कहा गया है कि कोवैक्सीन के साइड इफेक्ट का पैटर्न कोरोना की अन्य वैक्सीन के साइड इफेक्ट के पैटर्न से अलग है।

ऐसे में उनका सुझाव है कि वैक्सीन के प्रभाव को गहराई से समझने के लिए और अधिक दिनों तक नजर रखने की जरुरत है।