दिल्ली | राजवीर दीक्षित
(Surat comes to a standstill due to gas crisis: workers return to villages, crisis looms over industries) पश्चिम एशिया में जारी युद्ध और बढ़ते तनाव का असर अब भारत के उद्योगिक शहर सूरत में साफ देखने को मिल रहा है। ईरान, इज़राइल और अमेरिका के बीच बढ़ते टकराव के कारण LPG (रसोई गैस) की सप्लाई बुरी तरह प्रभावित हुई है। इसका सीधा असर सूरत के उद्योगों और वहां काम करने वाले हजारों प्रवासी मजदूरों पर पड़ा है।
सूरत के उधना रेलवे स्टेशन पर इन दिनों अपने गांव लौटने वाले मजदूरों की भारी भीड़ देखी जा रही है। मजदूरों का कहना है कि बाजार में गैस की कीमतें 500 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई हैं, जो उनके लिए बेहद महंगी है। कई मजदूरों ने बताया कि गैस की कमी के कारण वे कई दिनों से भूखे रहने को मजबूर हैं।
एक मजदूर सचिन ने कहा कि काम होने के बावजूद वे गांव लौट रहे हैं क्योंकि खाना बनाने के लिए गैस उपलब्ध नहीं है। वहीं एक महिला मजदूर ने बताया कि वह पिछले 15 दिनों से गैस लेने की कोशिश कर रही है, लेकिन हर बार निराशा ही हाथ लगी। स्थिति इतनी गंभीर हो चुकी है कि जब कुछ मजदूरों ने लकड़ी जलाकर खाना बनाने की कोशिश की, तो मकान मालिकों ने कमरे खराब होने के डर से उस पर भी रोक लगा दी।
इस संकट का असर अब सूरत के टेक्सटाइल उद्योग पर भी पड़ने लगा है, जहां मजदूरों की कमी का खतरा मंडरा रहा है। सरकार ने हालात को संभालने के लिए 497 करोड़ रुपये का राहत पैकेज घोषित किया है और ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बातचीत जारी है।
हालांकि, भारत के लिए राहत की खबर यह है कि दो LPG जहाज सुरक्षित देश पहुंच चुके हैं, जिससे सप्लाई धीरे-धीरे सामान्य होने की उम्मीद है।



















