टारगेट न्यूज़: पंजाब के मानसा में नशे के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद करने वाले सामाजिक कार्यकर्ता और एंटी-ड्रग एक्टिविस्ट परविंदर सिंह झोटा की हत्या के बाद राज्य का राजनीतिक और सामाजिक माहौल पूरी तरह से गरमाया हुआ है। एक तरफ जहां पूरे इलाके में शोक और आक्रोश की लहर दौड़ रही है, वहीं दूसरी ओर मृतक के परिवार ने न्याय मिलने तक अंतिम संस्कार करने से साफ इनकार कर दिया है। परविंदर सिंह झोटा के पिता और पूर्व सैनिक भीम सिंह ने एक बड़ा बयान देते हुए ऐलान किया है कि भले ही उनके बेटे का पार्थिव शरीर नश्वर है और उसमें बदलाव आ रहे हैं, लेकिन न्याय की यह लड़ाई और नशा मुक्ति का यह आंदोलन किसी भी कीमत पर कमजोर नहीं पड़ेगा। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं और आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई नहीं होती, तब तक यह धरना इसी प्रकार पूरी दृढ़ता के साथ जारी रहेगा, चाहे इसके लिए जो भी परिणाम भुगतने पड़े। इस घटना ने एक बार फिर से पंजाब में ड्रग्स के कारोबार और कानून व्यवस्था की स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, जिस पर विभिन्न राजनीतिक और सामाजिक संगठनों के नेता अपनी प्रतिक्रिया दे रहे हैं।
मुख्य बिंदु एवं हाइलाइट्स (Key Highlights)
- परविंदर सिंह झोटा के पिता भीम सिंह ने स्पष्ट किया है कि बेटे की अंतिम विदाई तब तक नहीं होगी जब तक न्याय नहीं मिलता।
- मानसा में एक केमिस्ट की दुकान पर ड्रग्स से जुड़े विवाद के दौरान फेसबुक लाइव के दौरान परविंदर की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी।
- इस गोलीबारी की घटना में एक राहगीर सहित कुल चार अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हो गए थे, जिनका इलाज जारी है।
- मृतक के नौ और छह साल के मासूम बेटों ने भी धरने पर बैठकर अपने पिता के संघर्ष को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया है।
- शिरोमणि अकाली दल और वारिस पंजाब दे के वरिष्ठ नेता तरस सिंह सहित कई प्रमुख नेता मानसा पहुंचकर सरकार के खिलाफ प्रदर्शन का समर्थन कर रहे हैं।
विस्तृत समाचार एवं पूरा घटनाक्रम (Detailed Report)
यह पूरा मामला पिछले मंगलवार का है जब मानसा जिले में एक केमिस्ट की दुकान पर ड्रग्स के अवैध कारोबार को लेकर विवाद हुआ था। आरोपी केमिस्ट अश्विनी कुमार ने कथित तौर पर परविंदर सिंह झोटा पर गोलियां चला दीं, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई। सबसे सनसनीखेज बात यह रही कि यह पूरी खौफनाक वारदात एक फेसबुक लाइव सेशन के दौरान कैमरे में कैद हो गई, जिसने पूरे पंजाब में सनसनी फैला दी। इस हमले में न केवल परविंदर की जान गई, बल्कि चार अन्य लोग भी बुरी तरह जख्मी हो गए। घटना के बाद से ही इलाके के लोगों और कार्यकर्ताओं में भारी गुस्सा है और वे सड़कों पर उतरकर लगातार विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। परविंदर का शव अभी भी मानसा के सिविल अस्पताल में रखा हुआ है और शोकाकुल परिवार ने अंतिम संस्कार करने से पूरी तरह मना कर दिया है। परिवार की मांग है कि जब तक इस मामले में संलिप्त सभी मुख्य आरोपियों और उनके संरक्षकों को गिरफ्तार नहीं किया जाता, तब तक वे अंतिम संस्कार नहीं करेंगे।
इस बीच, शनिवार की सुबह एक बेहद भावुक दृश्य देखने को मिला जब मृतक परविंदर के दो छोटे बच्चे, जिनकी उम्र महज नौ और छह वर्ष है, धरने वाले मंच पर पहुंचे और अपने परिवार तथा समर्थकों के साथ शांतिपूर्ण तरीके से ‘जाप’ में शामिल हुए। बच्चों की इस स्थिति को देखकर वहां मौजूद हर शख्स की आंखें नम हो गईं। परिवार का कहना है कि परविंदर ने पंजाब की युवा पीढ़ी को चिट्टे और अन्य सिंथेटिक नशों के दलदल से बचाने के लिए अपनी जान की बाजी लगा दी। उनके पिता भीम सिंह ने मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि उनके बेटे का शरीर भले ही पंचतत्व में विलीन हो जाए, लेकिन उसकी विचारधारा को मरने नहीं दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि उनका एकमात्र उद्देश्य पंजाब की धरती से नशे के काले कारोबार को जड़ से उखाड़ फेंकना है।
जो लोग यह कहते हैं कि मृतक शरीर खराब हो जाएगा, वे कहते रहें। यह वैज्ञानिक सोच है, आत्मा तो परमात्मा के चरणों में चली गई है। जब पूरी दुनिया हमारे साथ है, चाहे अकेले हड्डियां ही क्यों न बच जाएं, यह धरना और संघर्ष लगातार चलता रहेगा। – भीम सिंह, परविंदर झोटा के पिता
इस आंदोलन को अब विभिन्न धार्मिक और राजनीतिक संगठनों का भी समर्थन मिलने लगा है। शनिवार को जेल में बंद खडूर साहिब से सांसद अमृतपाल सिंह के पिता और वरिष्ठ नेता तरसम सिंह विशेष रूप से मानसा पहुंचे और धरने पर बैठकर राज्य सरकार की कार्यप्रणाली की कड़ी निंदा की। उन्होंने कहा कि पंजाब सरकार ड्रग माफियाओं पर नकेल कसने में पूरी तरह नाकाम साबित हो रही है और इसी का नतीजा है कि आज नशा विरोधी आवाज उठाने वालों को सरेआम गोलियों से भूना जा रहा है। नेताओं ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने जल्द ही ठोस कदम नहीं उठाए, तो इस आंदोलन को पूरे पंजाब में और अधिक आक्रामक रूप से फैलाया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।
भविष्य का असर एवं निष्कर्ष (Future Impact & Conclusion)
परविंदर सिंह झोटा की हत्या और उसके बाद उनके परिवार द्वारा किया जा रहा अनिश्चितकालीन धरना पंजाब की राजनीति और सामाजिक ताने-बाने पर दूरगामी प्रभाव छोड़ने वाला है। यह घटना एक बार फिर से इस बात को रेखांकित करती है कि पंजाब में नशा तस्करी के खिलाफ आवाज उठाना कितना खतरनाक और जोखिम भरा हो गया है। आम जनता और युवाओं के बीच सरकार और पुलिस प्रशासन के खिलाफ बढ़ता असंतोष आने वाले समय में एक बड़े जन आंदोलन का रूप ले सकता है। यदि समय रहते पुलिस प्रशासन ने इस मामले में पूरी पारदर्शिता के साथ त्वरित कार्रवाई नहीं की और दोषियों को कठोर सजा नहीं दिलाई, तो यह मामला पंजाब सरकार के लिए एक बड़ी राजनीतिक मुसीबत बन सकता है। फिलहाल, पूरा पंजाब परविंदर सिंह झोटा को न्याय मिलने की उम्मीद के साथ मानसा के इस धरने और न्याय की इस लड़ाई की ओर टकटकी लगाए देख रहा है।


















