चंडीगढ़।राजवीर दीक्षित
Concerns increase as ECA (Essential Commodities Act) is implemented! Will petrol and diesel become expensive soon? .सरकार ने एलपीजी और पेट्रोलियम सेवाओं पर जरूरी वस्तु अधिनियम (Essential Commodities Act – ECA) लागूईरान और इज़राइल के बीच बढ़ते वैश्विक तनाव के बीच भारत सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। कर दिया है। हालांकि अभी ESMA लागू नहीं किया गया है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के कारण देश में पेट्रोल और डीजल महंगे होने की अटकलें तेज हो गई हैं।
दरअसल भारत अपनी कुल तेल जरूरत का लगभग 85 प्रतिशत कच्चा तेल विदेशों से आयात करता है। ऐसे में मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव का सीधा असर भारत की तेल सप्लाई पर पड़ सकता है। ईरान-इज़राइल संघर्ष के कारण तेल टैंकरों के मुख्य मार्ग हॉर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर भी खतरा बढ़ गया है। अगर इस रास्ते पर अस्थिरता बढ़ती है तो तेल की ढुलाई का खर्च काफी बढ़ सकता है। इसके साथ ही डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये की कमजोरी भी आयातित तेल को और महंगा बना सकती है।
अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी जारी रहती है, तो तेल कंपनियों के लिए देश में पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ाना मजबूरी बन सकता है। इसका सीधा असर आम लोगों की जेब पर पड़ सकता है।
पेट्रोल-डीजल महंगा होने से सिर्फ वाहन चलाने का खर्च ही नहीं बढ़ेगा, बल्कि महंगाई की एक पूरी चेन शुरू हो सकती है। ट्रांसपोर्ट महंगा होने से फल-सब्जियों और अनाज जैसी जरूरी चीजों की कीमतें बढ़ सकती हैं। वहीं रोजाना सफर करने वाले लोगों का मासिक बजट भी बिगड़ सकता है। इसके अलावा लॉजिस्टिक्स और ऑनलाइन डिलीवरी सेवाएं भी महंगी हो सकती हैं।
सरकार का कहना है कि ECA लागू करने का मकसद ईंधन की जमाखोरी को रोकना और सप्लाई चेन को बनाए रखना है। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि अगर मध्य पूर्व में तनाव कम नहीं हुआ तो आने वाले दिनों में तेल कंपनियां कीमतों की समीक्षा कर सकती हैं।
इसी बीच पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों के चलते लोगों का रुझान अब धीरे-धीरे इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) की तरफ भी बढ़ रहा है, क्योंकि इन्हें चलाने का खर्च पारंपरिक ईंधन के मुकाबले काफी कम माना जाता है।
















