Home BJP राम मंदिर के पहले CEO की तलाश तेज! 5 हजार से ज्यादा आवेदनों में से 18 नाम फाइनल, अब होगा आमना-सामना,जानिए सारी जानकारी

राम मंदिर के पहले CEO की तलाश तेज! 5 हजार से ज्यादा आवेदनों में से 18 नाम फाइनल, अब होगा आमना-सामना,जानिए सारी जानकारी

अयोध्या । राजवीर दीक्षित
Search for Ram Mandir’s First CEO Intensifies! 18 Names Finalized from Over 5,000 Applications, Face-to-Face Interviews Next — Know All the Details अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि मंदिर ट्रस्ट में एक बेहद अहम जिम्मेदारी के लिए चयन प्रक्रिया अपने अंतिम दौर में पहुंच गई है। श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पहले Chief Executive Officer यानी CEO के लिए देशभर से आए 5 हजार से ज्यादा आवेदनों में से 18 उम्मीदवारों को शॉर्टलिस्ट किया गया है। करीब 20 दिनों तक आवेदनों की स्क्रीनिंग के बाद तीन सदस्यीय चयन समिति ने इन नामों को अंतिम इंटरव्यू के लिए चुना है।

सूत्रों के मुताबिक, शॉर्टलिस्ट किए गए उम्मीदवारों में ज्यादातर रिटायर्ड ब्यूरोक्रेट्स, पूर्व वरिष्ठ कॉरपोरेट अधिकारी और रिटायर्ड रक्षा अधिकारी शामिल हैं। दरअसल, मंदिर में दान से जुड़ी कथित चोरी के विवाद के बाद ट्रस्ट ने पिछले महीने CEO पद के लिए आवेदन मांगे थे। अब 11 और 12 अगस्त को उम्मीदवारों के आमने-सामने इंटरव्यू होंगे। इस दौरान सिर्फ उनके अनुभव और योग्यता को ही नहीं देखा जाएगा, बल्कि यह भी परखा जाएगा कि वे अयोध्या में रहकर इस जिम्मेदारी को संभालने के लिए कितने तैयार हैं।

कैसा व्यक्ति चाहिए ट्रस्ट को?
CEO पद के लिए कुछ खास शर्तें रखी गई थीं। उम्मीदवार का रिटायर्ड होना, हिंदू होना और 50 से 70 वर्ष की आयु के बीच होना जरूरी था। इसके अलावा बड़े संस्थान को संभालने का कम से कम 20 वर्षों का अनुभव और भगवान राम के प्रति समर्पण को भी पात्रता का हिस्सा बनाया गया था। चयन समिति के एक सदस्य के मुताबिक, 5 हजार से अधिक आवेदनों को तय मानकों के आधार पर छांटा गया। कुछ उम्मीदवारों से वर्चुअल बातचीत भी की गई ताकि उनकी सोच और अनुभव को बेहतर तरीके से समझा जा सके।

CEO के सामने होगी बड़ी जिम्मेदारी
ट्रस्ट का पहला CEO सिर्फ प्रशासनिक काम देखने वाला अधिकारी नहीं होगा। उसे एक बड़े धार्मिक और सार्वजनिक संस्थान की रोजमर्रा की व्यवस्था संभालनी होगी।
उसकी जिम्मेदारियों में ट्रस्ट के कानूनी, प्रशासनिक और वित्तीय कामकाज को व्यवस्थित करना, नए सिस्टम और प्रक्रियाएं तैयार करना तथा कर्मचारियों और अधिकारियों की पूरी व्यवस्था देखना शामिल होगा। इसके साथ ही CEO को यह भी सुनिश्चित करना होगा कि ट्रस्ट सभी कानूनी, नियामकीय और Trust Deed से जुड़ी शर्तों का पालन करे। वित्तीय लेन-देन और खातों में पारदर्शिता बनाए रखना भी उसकी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी होगी।

सुरक्षा से लेकर भक्तों की सुविधा तक जिम्मा
अयोध्या में लगातार बढ़ती श्रद्धालुओं की संख्या को देखते हुए CEO के सामने सुरक्षा और व्यवस्थाओं की बड़ी चुनौती भी होगी। स्थानीय प्रशासन के साथ-साथ राज्य और केंद्र सरकार के साथ जरूरी समन्वय करना भी उसके काम का हिस्सा होगा। इसके अलावा दैनिक पूजा, धार्मिक अनुष्ठान और त्योहारों की व्यवस्था, मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुविधाएं तथा उनके अनुभव को बेहतर बनाना भी CEO की जिम्मेदारी होगी। देश से आने वाले विशिष्ट मेहमानों और प्रमुख संतों के दौरे की व्यवस्था भी इसी पद के दायरे में आएगी।

18 में से आखिर कौन बनेगा पहला CEO
11 और 12 अगस्त के इंटरव्यू के बाद चयन समिति सभी उम्मीदवारों के प्रदर्शन पर विचार करेगी और तीन नामों की सिफारिश ट्रस्ट को भेजेगी। इसके बाद सितंबर में होने वाली ट्रस्ट की अगली बैठक में इन नामों पर विचार किया जाएगा और फिर पहले CEO के नाम पर अंतिम फैसला लिया जाएगा। तीन सदस्यीय चयन समिति में सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश जस्टिस प्रमोद कोहली, रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल विष्णुकांत चतुर्वेदी और रिटायर्ड परमाणु वैज्ञानिक एवं शिरडी के श्री साईबाबा संस्थान ट्रस्ट के पूर्व अध्यक्ष सुरेश हावरे शामिल हैं। यानी अब नजरें 11-12 अगस्त के इंटरव्यू और सितंबर में होने वाले अंतिम फैसले पर टिकी हैं—क्योंकि इसी प्रक्रिया से तय होगा कि श्रीराम मंदिर ट्रस्ट के प्रशासन की कमान संभालने वाला पहला CEO कौन होगा।

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