शिमला/नई दिल्ली। राजवीर दीक्षित
(Major agreement on Kishau Dam tomorrow after 17 years; MoU to involve 6 states) लंबे समय से अटकी किशाऊ बहुउद्देशीय बांध परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए 15 सितंबर को नई दिल्ली में छह राज्यों के बीच समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर होंगे। हिमाचल के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू इस कार्यक्रम में शामिल होंगे। एमओयू हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, दिल्ली और राजस्थान के बीच होगा।
पानी के बदले हिमाचल को बिजली में हिस्सेदारी
केंद्र सरकार की पहल पर जून में राज्यों के बीच परियोजना की लागत और पानी के बंटवारे को लेकर सहमति बनी थी। तय फॉर्मूले के अनुसार परियोजना के जल घटक की 90 फीसदी लागत केंद्र सरकार वहन करेगी, जबकि बाकी 10 फीसदी राशि छह राज्यों को मिलकर देनी होगी। हिमाचल के हिस्से के पानी को दिल्ली और राजस्थान को देने के बदले इन राज्यों की ओर से हिमाचल के बिजली घटक की लागत में योगदान किया जाएगा।
660 मेगावाट बिजली, 1324 एमसीएम पानी
किशाऊ परियोजना टौंस नदी पर हिमाचल के सिरमौर और उत्तराखंड के देहरादून क्षेत्र की सीमा पर प्रस्तावित है। इसकी स्थापित क्षमता 660 मेगावाट है। परियोजना में 236 मीटर ऊंचे कंक्रीट ग्रेविटी बांध का निर्माण प्रस्तावित है।
बांध में करीब 1324 मिलियन क्यूबिक मीटर लाइव जल भंडारण की क्षमता होगी। इससे लगभग 97,076 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई की सुविधा और पेयजल व औद्योगिक उपयोग के लिए पानी उपलब्ध कराने की योजना है। सालाना करीब 1379 मिलियन यूनिट बिजली उत्पादन का अनुमान है।
हिमाचल के 8 गांव होंगे प्रभावित
परियोजना से हिमाचल में करीब 1,498 हेक्टेयर और उत्तराखंड में 1,452 हेक्टेयर क्षेत्र डूब क्षेत्र में आने का अनुमान है। परियोजना दस्तावेजों के अनुसार दोनों राज्यों में कुल 17 गांव प्रभावित होंगे और करीब 5,498 लोगों के पुनर्वास की जरूरत पड़ेगी। इनमें हिमाचल के 8 गांव और करीब 2,092 लोग शामिल हैं।
2008 में राष्ट्रीय परियोजना घोषित
किशाऊ परियोजना को 2008 में राष्ट्रीय परियोजना घोषित किया गया था, लेकिन पानी के बंटवारे और लागत वहन समेत कई मुद्दों के कारण यह लंबे समय से अटकी रही। जून 2026 में छह राज्यों के बीच सहमति बनने के बाद अब एमओयू का रास्ता साफ हुआ है। समझौते के बाद परियोजना को अंतिम मंजूरी के लिए केंद्रीय मंत्रिमंडल के सामने रखा जाना है।



















