Home crime कनाडा में 1500 स्टूडेंट्स फंसे, एजेंटों पर सवाल

कनाडा में 1500 स्टूडेंट्स फंसे, एजेंटों पर सवाल

जालंधर। राजवीर दीक्षित

(1,500 students stranded in Canada; questions raised about agents#) कनाडा के कैलगरी स्थित पोर्टेज कॉलेज में पढ़ाई करने वाले करीब 1500 पंजाबी स्टूडेंट्स का मामला अब विवादों में है। छात्रों और उनके परिजनों का आरोप है कि जिस कॉलेज में उन्हें दाखिला दिलाया गया, वहां के कुछ कोर्स बाद में नॉन-क्रेडिट घोषित कर दिए गए। इससे पढ़ाई पूरी करने के बाद मिलने वाले अवसरों को लेकर छात्रों की मुश्किलें बढ़ गई हैं।

मामले के तार जालंधर के कुछ इमिग्रेशन एजेंटों से जुड़ने के आरोपों के बाद सोमवार को बस स्टैंड के पास स्थित पिरामिड ई-सर्विस के दफ्तर में छात्रों और परिजनों ने हंगामा किया। पीड़ित परिवारों का आरोप है कि एजेंटों के माध्यम से छात्रों को पोर्टेज कॉलेज में दाखिला दिलाया गया और अब कॉलेज प्रबंधन व एजेंटों की ओर से संतोषजनक जवाब नहीं दिया जा रहा।

इसी दौरान गुरदासपुर से जालंधर पहुंची एक महिला ने अपनी बेटी के मामले की जानकारी दी। महिला के अनुसार, करीब दो साल पहले एजेंट के जरिए बेटी का कनाडा स्टडी वीजा लगवाया गया था। उसे कैलगरी के पोर्टेज कॉलेज में दाखिला दिलाया गया और परिवार ने पढ़ाई व अन्य खर्चों पर करीब 32 लाख रुपए खर्च किए।

एक दिन में मिला ऑफर लेटर, दो साल बाद सामने आई परेशानी

पीड़ित महिला का आरोप है कि एजेंट ने महज एक दिन में ऑफर लेटर उपलब्ध करवाया था। बेटी ने करीब दो साल तक पढ़ाई की, लेकिन बाद में पता चला कि संबंधित कोर्स की मान्यता और क्रेडिट को लेकर समस्या है।

परिवार का कहना है कि अब बेटी को पढ़ाई पूरी करने के लिए दूसरे कॉलेज में दोबारा समय और पैसा लगाना पड़ सकता है। इससे परिवार पर आर्थिक बोझ बढ़ गया है।

नॉन-क्रेडिट कोर्स को लेकर छात्रों की परेशानी

स्टूडेंट्स के अनुसार, 2024 में पंजाब के अलग-अलग हिस्सों से करीब 1500 विद्यार्थियों ने पोर्टेज कॉलेज में प्लंबिंग, होम साइंस और ऑफिस मैनेजमेंट जैसे कोर्सों में दाखिला लिया था।

2026 में कोर्स पूरा होने के बाद जब कुछ छात्रों ने पोस्ट-ग्रेजुएशन वर्क परमिट (PGWP) के लिए आवेदन किया तो उन्हें कोर्स के क्रेडिट स्टेटस को लेकर परेशानी का सामना करना पड़ा। छात्रों का दावा है कि संबंधित पढ़ाई को नॉन-क्रेडिट माना गया।

विरोध के बाद छात्रों के सामने दूसरे कॉलेज में पढ़ाई जारी रखने या वापस लौटने जैसे विकल्प रखे जाने की बात कही जा रही है।

1500 छात्रों से जुड़े करीब ₹480 करोड़ का दावा

पीड़ित छात्रों का दावा है कि प्रत्येक विद्यार्थी से करीब 32 लाख रुपए तक खर्च हुए। 1500 छात्रों के आधार पर यह रकम करीब 480 करोड़ रुपए बैठती है। हालांकि, यह राशि छात्रों के दावों पर आधारित अनुमान है और इसकी स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।

छात्रों और परिजनों का आरोप है कि जालंधर समेत पंजाब में सक्रिय एजेंटों के माध्यम से कॉलेज के ऑफर लेटर हासिल किए गए और उनके आधार पर स्टडी वीजा की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई।

एजेंटों पर दस्तावेजों को लेकर भी गंभीर आरोप

मामले में कुछ एजेंटों पर फर्जी दस्तावेज तैयार करने, एडवांस रकम लेने और छात्रों को गलत जानकारी देने जैसे आरोप भी लगाए गए हैं। हालांकि, इन आरोपों की पुलिस जांच के बाद ही पुष्टि हो सकेगी।

पीड़ित परिवारों का कहना है कि उन्होंने इमिग्रेशन प्रक्रिया की पूरी फीस दी, लेकिन अब संबंधित एजेंट उनसे मिलने और मामले पर स्पष्ट जवाब देने से बच रहे हैं। परिवारों ने पुलिस शिकायत के साथ-साथ जरूरत पड़ने पर अदालत का रुख करने की बात कही है।

2016 में भी जालंधर के इमिग्रेशन सेंटरों पर हुई थी कार्रवाई

मामले के बीच जालंधर में वर्ष 2016 में इमिग्रेशन सेंटरों पर हुई पुलिस कार्रवाई का मामला भी सामने आया है। उस दौरान पुलिस ने कई ट्रैवल एजेंटों के खिलाफ केस दर्ज कर नकदी, पासपोर्ट, कंप्यूटर और अन्य दस्तावेज बरामद किए थे।

अब पोर्टेज कॉलेज विवाद में एक बार फिर जालंधर के कुछ इमिग्रेशन एजेंटों के नाम सामने आने के बाद मामले ने तूल पकड़ लिया है।

पुलिस: शिकायत मिलने पर होगी कार्रवाई

बस स्टैंड पुलिस चौकी प्रभारी लखबीर ने कहा कि फिलहाल इस मामले में पुलिस के पास कोई लिखित शिकायत नहीं पहुंची है। उन्होंने कहा कि यदि पीड़ित पक्ष शिकायत देता है तो पूरे मामले की जांच कर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

फिलहाल छात्रों और उनके परिजनों की नजर पुलिस कार्रवाई और कनाडा में संबंधित संस्थाओं के अगले कदम पर है।

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