कांगड़ा । राजवीर दीक्षित
(45 e-buses on the roads of Kangra; Himachal moves towards green mobility)कांगड़ा में ग्रीन ट्रांसपोर्ट की तस्वीर अब सड़कों पर दिखाई देने लगी है। जिले के अलग-अलग रूटों पर HRTC की 45 इलेक्ट्रिक बसें यात्रियों को सफर करवा रही हैं। सरकार की ग्रीन मोबिलिटी पहल के तहत शुरू की गई यह व्यवस्था प्रदूषण कम करने के साथ-साथ बस संचालन की लागत घटाने पर भी केंद्रित है।
HRTC के डिविजनल मैनेजर पंकज चड्ढा के मुताबिक, डीजल बस को एक किलोमीटर चलाने में करीब 25 से 26 रुपये का खर्च आता है। इसके मुकाबले इलेक्ट्रिक बस महज 11 से 12 रुपये प्रति किलोमीटर में चल रही है। इससे साफ है कि इलेक्ट्रिक परिवहन भविष्य में HRTC के लिए कम खर्च और कम प्रदूषण वाला विकल्प बन सकता है।
इन इलेक्ट्रिक बसों में यात्रियों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी गई है। CCTV कैमरों की निगरानी के साथ बस में ऐसी तकनीक लगाई गई है कि दोनों दरवाज़े बंद हुए बिना बस आगे नहीं बढ़ेगी। इलेक्ट्रिक होने के कारण सफर भी काफी शांत और आरामदायक रहता है। यानी सुरक्षा, सुविधा और आधुनिक तकनीक—तीनों एक साथ।
जिले में ई-बसों को मिली ‘चार्जिंग पावर’
इलेक्ट्रिक बसों की बढ़ती संख्या के बीच चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत किया जा रहा है। धर्मशाला, नगरोटा बगवां, देहरा, पालमपुर, पठानकोट, बैजनाथ, जस्सुर और कांगड़ा में करीब 6.35 करोड़ रुपये की लागत से चार्जिंग स्टेशन तैयार हो चुके हैं। वहीं, जयसिंहपुर और शाहपुर में करीब 1.26 करोड़ रुपये की लागत से नए चार्जिंग स्टेशन बनाने का प्रस्ताव है। इससे ई-बसों के संचालन को गति मिलेगी और जिले में पर्यावरण अनुकूल सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा मिलेगा।
फास्ट चार्जिंग से बदलेगा ई-बसों का रूट नेटवर्क
फास्ट चार्जिंग सुविधा इलेक्ट्रिक बसों के संचालन में अहम भूमिका निभा रही है। इसी को ध्यान में रखते हुए नए रूटों की प्लानिंग की जा रही है। करीब 170 से 250 किलोमीटर तक की दूरी वाले मार्गों को संभावित रूप से शामिल किया जा रहा है। रूट फाइनल करने से पहले सर्वे के जरिए सड़क की स्थिति, दूरी, यात्री संख्या और चार्जिंग की उपलब्धता जैसी बातों का आकलन किया जा रहा है।
इलेक्ट्रिक बसों ने बदला सफर का अंदाज, यात्रियों को मिल रही बेहतर सुविधा
इलेक्ट्रिक बसों को चलाने के लिए ड्राइवरों को विशेष प्रशिक्षण दिया गया है। इनके संचालन और रखरखाव की जिम्मेदारी के लिए कंपनी के साथ 12 साल का अनुबंध किया गया है। अधिकारियों का कहना है कि इलेक्ट्रिक बसों में सफर शांत, सुगम और आरामदायक है। यही वजह है कि कुछ रूटों पर इन बसों को यात्रियों की अच्छी प्रतिक्रिया मिल रही है। खासकर अंतर-राज्यीय रूटों पर इनकी सुविधा से पर्यटकों की यात्रा भी आसान हुई है।
चड्ढा के मुताबिक, मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू और उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री की अगुवाई में हिमाचल प्रदेश इलेक्ट्रिक मोबिलिटी की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। सरकार पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ आधुनिक और टिकाऊ परिवहन व्यवस्था को मजबूत करने पर जोर दे रही है।



















