मोहाली। राजवीर दीक्षित
(50 teachers honored in Punjab, what did CM Mann say?) शिक्षक दिवस के मौके पर पंजाब सरकार की ओर से मोहाली के सेक्टर-62 स्थित विकास भवन में शिक्षक सम्मान समारोह आयोजित किया गया। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री भगवंत मान मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने प्रदेश के 50 शिक्षकों को सम्मानित किया।
समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने शिक्षकों को समाज और राष्ट्र निर्माण की मजबूत नींव बताया। उन्होंने कहा कि शिक्षक और विद्यार्थी का रिश्ता बेहद खास होता है। उन्होंने अपने बचपन का जिक्र करते हुए कहा, “मैं खुद एक अध्यापक का बेटा हूं और मैंने घर में शिक्षक की जिंदगी की मुश्किलों को करीब से देखा है।”
हेड मास्टर पर था काम का ज्यादा बोझ
भगवंत मान ने कहा कि पहले सरकारी स्कूलों में हेड मास्टर पर कई तरह की जिम्मेदारियां होती थीं। स्कूल की कुर्सी से लेकर बाथरूम की व्यवस्था, रजिस्टर ले जाने, हाजिरी और छुट्टियों की मंजूरी तक का काम उन्हीं के जिम्मे रहता था।
उन्होंने कहा कि उन्होंने शिक्षा मंत्री से हेड मास्टरों का कामकाजी बोझ कम करने को लेकर भी चर्चा की है, ताकि वे शिक्षा की गुणवत्ता और स्कूल प्रबंधन पर ज्यादा ध्यान दे सकें।
सरकारी स्कूलों में शुरू की पैरेंट्स-टीचर मीटिंग
मुख्यमंत्री ने कहा कि पहले सरकारी स्कूलों में पैरेंट्स-टीचर मीटिंग का चलन कम था, जबकि निजी स्कूलों में ऐसी बैठकें नियमित होती थीं। पंजाब सरकार ने सरकारी स्कूलों में भी पैरेंट्स-टीचर मीटिंग शुरू करवाई।
उन्होंने कहा कि इसका मकसद माता-पिता को बच्चों की पढ़ाई और शिक्षकों के बारे में जानकारी देना है। साथ ही शिक्षक भी यह समझ सकें कि स्कूल के बाद बच्चे का माहौल कैसा है।
मान के मुताबिक पिछली पैरेंट्स-टीचर मीटिंग में करीब 24 लाख अभिभावकों ने हिस्सा लिया।
चार साल में स्कूलों का कायापलट करने का दावा
मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2021 में पंजाब शिक्षा के क्षेत्र में 27वें स्थान पर था और 2022 में उनकी सरकार बनने के बाद स्कूलों में लगातार सुधार किए गए।
उन्होंने दावा किया कि अब सरकारी स्कूलों में बच्चों के लिए बेंच, बेहतर बाथरूम, चारदीवारी, क्लेरिकल स्टाफ और पर्याप्त शिक्षण स्टाफ जैसी सुविधाओं पर काम हुआ है। शिक्षकों की भर्ती के साथ उनकी ट्रेनिंग पर भी जोर दिया गया है।
अपने पुराने शिक्षकों को किया याद
भगवंत मान ने समारोह के दौरान अपने स्कूल के दिनों के शिक्षकों को भी याद किया। उन्होंने सामाजिक शिक्षा के शिक्षक रामेश्वर दास, हिंदी के शिक्षक मेनू राम और कस्तूरी लाल का जिक्र करते हुए कहा कि कलाकार बनने के बाद भी जब वह उनसे मिले तो हमेशा उनका सम्मान किया और उनके पैर छुए।
उन्होंने कहा कि किसी पेड़ पर फल आने के बाद सबसे ज्यादा खुशी उस व्यक्ति को होती है, जिसने उस पेड़ को लगाया और उसकी देखभाल की। “शिक्षक भी वही माली हैं, जो बच्चों के भविष्य को तैयार करते हैं।”
‘कोई बच्चा अपने अध्यापक को नहीं भूलता’
मुख्यमंत्री ने कहा कि आज उनके पुराने अध्यापकों और प्रोफेसरों को गर्व होता है कि उनका पढ़ाया हुआ विद्यार्थी मुख्यमंत्री के पद तक पहुंचा है।
उन्होंने सम्मानित शिक्षकों से कहा कि उनके सामने बैठे हर शिक्षक किसी न किसी बच्चे के भविष्य का निर्माण कर रहा है। यही वजह है कि शिक्षक का योगदान विद्यार्थी की सफलता के साथ हमेशा जुड़ा रहता है।



















