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कंगना रनौत ने उठाए सिस्टम पर सवाल, कहा- जनता का 30 से 40% पैसा गलत हाथों में

मंडी । राजवीर दीक्षित

(Kangana Ranaut questions the system, says 30-40% of public money is in the wrong hands)हिमाचल प्रदेश के मंडी जिला मुख्यालय स्थित उपायुक्त कार्यालय सभागार में आयोजित जिला विकास समन्वय एवं निगरानी समिति (दिशा) की बैठक में सांसद कंगना रनौत का सख्त तेवर देखने को मिला। सांसद निधि (एमपीलैड) से राशि आवंटित होने के बावजूद विकास कार्यों में हो रही देरी और कथित फर्जीवाड़े पर उन्होंने अधिकारियों को जमकर फटकार लगाई। कंगना ने स्पष्ट किया कि जनता के विकास के लिए जारी धनराशि का समय पर और सही इस्तेमाल सुनिश्चित करना अधिकारियों की जिम्मेदारी है।
बैठक को संबोधित करते हुए कंगना रनौत ने सरकारी धन के इस्तेमाल को लेकर कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि करीब 30 से 40 प्रतिशत पैसा ऐसे लोगों के पास फंसा हुआ है, जो इसके हकदार नहीं हैं। कंगना ने दो टूक कहा कि जनता के पैसे पर कुंडली मारकर बैठने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी और जरूरत पड़ने पर उन्हें हमेशा के लिए ब्लैकलिस्ट किया जाएगा।

बिना एनओसी और जमीन से संबंधित जरूरी औपचारिकताएं पूरी किए राशि लेने की प्रक्रिया पर अब सवाल उठने लगे हैं। बताया गया कि कुछ लोग भाईचारे के आधार पर 5-10 लोगों के दस्तखत करवाकर राशि प्राप्त कर लेते हैं, लेकिन इसके बाद लंबे समय तक कोई काम नहीं किया जाता। इससे सरकारी व्यवस्था और संसाधनों के दुरुपयोग की आशंका बढ़ती है। मामले को गंभीरता से लेते हुए जिला प्रशासन को सख्त नियम बनाने तथा राशि जारी करने से पहले सभी कानूनी औपचारिकताएं अनिवार्य रूप से पूरी कराने के निर्देश दिए गए हैं।

काम में देरी पड़ी भारी, राशि वापसी के साथ जुर्माने की मांग
कंगना ने कहा कि योजना के तहत राशि प्राप्त करने के बाद भी यदि कोई व्यक्ति निर्धारित समय में काम शुरू नहीं करता है, तो उसके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। ऐसे लोगों से राशि वापस लेने के साथ जुर्माना लगाने की व्यवस्था की जाए। उन्होंने कहा कि इससे योजनाओं का सही क्रियान्वयन सुनिश्चित होगा और सरकारी मदद वास्तविक लाभार्थियों तक समय पर पहुंच सकेगी।

दावों की भरमार, जमीन पर अधूरे काम; कंगना ने मांगी रिपोर्ट
कंगना ने अधिकारियों की ओर से पेश की जा रही प्रगति रिपोर्ट को लेकर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि दिशा की बैठकों में दावों की भरमार है, लेकिन जब स्वतंत्र एजेंसियां मौके पर जाकर काम की जांच करती हैं तो कई परियोजनाएं 50 प्रतिशत भी पूरी नहीं मिलतीं। उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल रिपोर्ट और दावों से काम नहीं चलेगा। 20, 40 और 50 प्रतिशत तक प्रगति वाले सभी कार्यों की एजेंसी और व्यक्ति के अनुसार सूची तैयार कर तत्काल पेश करने के निर्देश दिए गए।

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