चंडीगढ़। राजवीर दीक्षित
(Magh Mela 2026 Begins in Prayagraj)प्रयागराज की पावन धरती पर आज से माघ मेला 2026 का भव्य शुभारंभ हो गया है। आस्था, सनातन परंपरा और आध्यात्मिक ऊर्जा का यह महापर्व हर वर्ष लाखों श्रद्धालुओं को अपनी ओर आकर्षित करता है। हिंदू पंचांग के अनुसार माघ मास को ‘देव मास’ कहा जाता है और इस दौरान त्रिवेणी संगम में स्नान करना अक्षय पुण्य, पापों से मुक्ति और मोक्ष प्राप्ति का साधन माना जाता है।
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सूत्रों के अनुसार, माघ मेला 3 जनवरी से 15 फरवरी 2026 तक चलेगा। इस दौरान देश ही नहीं, बल्कि विदेशों से भी साधु-संत, कल्पवासी और श्रद्धालु संगम तट पर पहुंचेंगे। प्रशासन द्वारा सुरक्षा, स्वच्छता और यातायात के विशेष इंतजाम किए गए हैं, ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो।
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माघ मेले के दौरान कुल 6 प्रमुख स्नान पर्व होंगे, जिनमें पौष पूर्णिमा से लेकर महाशिवरात्रि तक के स्नान को विशेष धार्मिक महत्व प्राप्त है। इनमें सबसे महत्वपूर्ण स्नान मौनी अमावस्या (18 जनवरी 2026) को माना गया है। मान्यता है कि इस दिन मौन रहकर किया गया स्नान मानसिक शांति, आत्मिक बल और मोक्ष का मार्ग प्रशस्त करता है।
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इसके साथ ही माघ मेले की एक अनूठी परंपरा कल्पवास भी श्रद्धालुओं के बीच आकर्षण का केंद्र है। कल्पवासी 29 दिनों तक संगम तट पर रहकर नियम, संयम और साधना के साथ जीवन व्यतीत करते हैं।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, स्नान और दान के लिए ब्रह्म मुहूर्त सबसे श्रेष्ठ माना गया है। श्रद्धालुओं को सलाह दी गई है कि वे सुबह 4:00 बजे से 5:30 बजे के बीच स्नान करें, क्योंकि इस समय किया गया पुण्य कर्म कई गुना फलदायी माना जाता है।
माघ मेला 2026 न केवल एक धार्मिक आयोजन है, बल्कि भारतीय संस्कृति, आस्था और एकता का जीवंत प्रतीक भी है।

















