क्या बदलेंगे टैक्स स्लैब या बढ़ेगी छूट की सीमा? 1 अप्रैल से लागू होगा नया इनकम टैक्स एक्ट!

नई दिल्ली। राजवीर दीक्षित
(Big Expectations from Union Budget 2026 on Income Tax)यूनियन बजट 2026 से पहले इनकम टैक्स को लेकर देशभर के टैक्सपेयर्स में जबरदस्त चर्चा और उत्सुकता बनी हुई है। फरवरी का महीना हमेशा से बजट के कारण खास रहता है, लेकिन इस बार नौकरीपेशा और मिडिल क्लास की निगाहें खास तौर पर इस बात पर टिकी हैं कि क्या सरकार टैक्स स्लैब में बदलाव करेगी या फिर छूट की सीमा बढ़ाकर राहत देगी। 1 फरवरी को संसद में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के बजट भाषण से करोड़ों लोगों को उम्मीदें हैं।

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पिछले कुछ वर्षों में सरकार ने इनकम टैक्स सिस्टम को सरल, पारदर्शी और यूज़र-फ्रेंडली बनाने की दिशा में कई अहम कदम उठाए हैं। यूनियन बजट 2020 में नई टैक्स प्रणाली की शुरुआत इसी सोच का हिस्सा थी, जिसमें कम टैक्स दरों के बदले डिडक्शन और एग्जेम्प्शन छोड़ने का विकल्प दिया गया। इसका मकसद टैक्सपेयर्स को जटिल टैक्स प्लानिंग से राहत देना था।

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बजट 2025 में सरकार ने नई टैक्स प्रणाली के तहत सालाना 12 लाख रुपये तक की आय को टैक्स फ्री कर बड़ा तोहफा दिया था। साथ ही बेसिक एग्जेम्प्शन लिमिट को 4 लाख रुपये तक बढ़ाया गया और नौकरीपेशा लोगों के लिए 75,000 रुपये का स्टैंडर्ड डिडक्शन लागू किया गया, जिससे सैलरी क्लास को सीधा फायदा मिला।

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अब बजट 2026 से पहले 1 अप्रैल से नया इनकम टैक्स एक्ट, 2025 लागू होने जा रहा है, जो 1961 के पुराने कानून की जगह लेगा। हालांकि टैक्स रेट या स्लैब में बड़े बदलाव की संभावना कम मानी जा रही है, लेकिन नियमों की भाषा को आसान बनाने और टैक्स प्रशासन को और प्रभावी बनाने पर जोर दिया जा सकता है।

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टैक्स विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार नई टैक्स प्रणाली में कुछ जरूरी डिडक्शन्स जोड़ सकती है, जैसे टर्म लाइफ इंश्योरेंस, हेल्थ इंश्योरेंस और होम लोन ब्याज पर छूट। अगर ऐसा होता है तो नई टैक्स प्रणाली की लोकप्रियता और बढ़ सकती है, जिससे टैक्सपेयर्स के साथ-साथ सरकार को भी फायदा होगा।