नई दिल्ली। राजवीर दीक्षित
(Big Relief for Mutual Fund Investors)म्यूचुअल फंड निवेशकों के लिए सेबी का यह फैसला आने वाले समय में निवेश के तरीके को पूरी तरह बदलने वाला साबित हो सकता है। मार्केट रेगुलेटर सेबी ने करीब 30 साल पुराने ढांचे में बड़ा सुधार करते हुए ऐसे नियम लागू करने का ऐलान किया है, जिससे पारदर्शिता बढ़ेगी और निवेशकों का भरोसा मजबूत होगा। नए ढांचे के तहत अब फंड हाउसों को बेस एक्सपेंस रेशियो (BER) में प्रबंधन शुल्क और सरकारी करों जैसे GST और STT का अलग-अलग खुलासा करना अनिवार्य होगा। इससे निवेशकों को पहली बार साफ तौर पर यह जानकारी मिलेगी कि उनके निवेश का पैसा किन-किन मदों में खर्च हो रहा है।
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अब तक कुल व्यय अनुपात (TER) के जरिए सभी खर्च एक साथ दिखाए जाते थे, जिससे निवेशकों को वास्तविक लागत का अंदाजा नहीं लग पाता था। लेकिन 1 अप्रैल 2026 से लागू होने वाले नए नियमों के बाद खर्चों की पूरी तस्वीर सामने होगी। इसके साथ ही सेबी ने निवेशकों को बड़ी राहत देते हुए साफ किया है कि यदि किसी म्यूचुअल फंड स्कीम के खर्च तय सीमा से अधिक होते हैं, तो उसका बोझ निवेशकों पर नहीं बल्कि AMC पर पड़ेगा। इससे निवेशकों के रिटर्न सुरक्षित रहेंगे।
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ट्रेडिंग लागत घटाने के लिए ब्रोकरेज चार्ज में भी बड़ी कटौती की गई है। कैश मार्केट और डेरिवेटिव्स दोनों में ब्रोकरेज दरें कम की गई हैं, वहीं 2018 से लागू अतिरिक्त एग्जिट लोड को पूरी तरह खत्म कर दिया गया है। यह कदम छोटे और नए निवेशकों के लिए खास तौर पर फायदेमंद माना जा रहा है।
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इसके अलावा KYC प्रक्रिया को भी सरल बनाया गया है। अब निवेशकों को बार-बार दस्तावेज जमा करने की जरूरत नहीं होगी और आधार-पैन से जुड़ी कई औपचारिकताएं खत्म होंगी। विदेशी निवेशकों को आकर्षित करने के लिए FPI रजिस्ट्रेशन और KYC की वैधता बढ़ाकर 10 साल कर दी गई है। कुल मिलाकर, सेबी के ये फैसले निवेशकों के लिए पारदर्शिता, सुविधा और भरोसे का नया दौर शुरू करने वाले हैं।

















