शिमला। राजवीर दीक्षित
(Himachal’s 9 Villages Go Silent for 45 Days)आज के दौर में जहां कुछ मिनट मोबाइल बिना बजे तो बेचैनी होने लगती है, वहीं हिमाचल प्रदेश के मनाली क्षेत्र से सटी ऊझी घाटी के नौ गांवों ने डेढ़ महीने के लिए पूर्ण मौन अपना लिया है। इन गांवों में न मोबाइल की घंटी बजेगी, न टीवी चलेगा, न डीजे की आवाज आएगी और न ही मंदिरों की घंटियां सुनाई देंगी। यह कोई प्रशासनिक फैसला नहीं, बल्कि सदियों पुरानी देव परंपरा के तहत दिया गया देव आदेश है, जिसका पालन करना हर ग्रामीण और यहां आने वाले सैलानियों के लिए अनिवार्य है।
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गौशाल, कोठी, सोलंग, पलचान, रूआड़, कुलंग, शनाग, बुरूआ और मझाच गांवों में अगले डेढ़ महीने तक शोर-शराबे पर पूरी तरह रोक रहेगी। मंदिरों में पूजा स्थगित कर दी गई है और घंटियों को बांध दिया गया है, ताकि किसी तरह की आवाज न हो। मान्यता है कि मकर संक्रांति के बाद घाटी के आराध्य देवता—गौतम ऋषि, ब्यास ऋषि और नाग देवता—तपस्या में लीन रहते हैं। तपस्या के दौरान शांत वातावरण बनाए रखने के लिए टीवी, रेडियो और मोबाइल तक बंद कर दिए जाते हैं।
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इतना ही नहीं, मनाली के सिमसा गांव में देवता कार्तिक स्वामी के मंदिर के कपाट भी एक महीने के लिए बंद कर दिए गए हैं। सिमसा के साथ कन्याल, छियाल, मढ़ी और रांगड़ी गांवों में भी किसी भी तरह के शोर पर प्रतिबंध है। पुजारियों और ग्रामीणों का कहना है कि यह परंपरा हजारों साल पुरानी है और आज भी पूरी श्रद्धा के साथ निभाई जा रही है। खास बात यह है कि आधुनिक सोच वाली युवा पीढ़ी भी इस देव आदेश का पूरी निष्ठा से पालन कर रही है।

















