नई दिल्ली। राजवीर दीक्षित
(Repeated Nighttime Awakenings: A Hidden Risk to Heart & Brain)आज की तेज़ रफ्तार और तनाव से भरी जिंदगी में नींद से जुड़ी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। खासतौर पर रात में बार-बार नींद टूटना अब सिर्फ थकान या दिनचर्या की समस्या नहीं रह गई है, बल्कि यह दिल और दिमाग से जुड़ी गंभीर बीमारियों का संकेत भी हो सकता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, अगर किसी व्यक्ति की नींद हर रात बार-बार खुल रही है, तो इसे नजरअंदाज करना खतरनाक साबित हो सकता है।
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नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन में प्रकाशित एक ताजा शोध में खुलासा हुआ है कि रात में नींद का बार-बार टूटना दिल की सेहत पर गहरा असर डालता है। शोध के मुताबिक, एक स्वस्थ शरीर के लिए रोजाना 7 से 8 घंटे की लगातार और गहरी नींद बेहद जरूरी है। जब नींद पूरी नहीं हो पाती, तो शरीर को खुद की मरम्मत करने का पर्याप्त समय नहीं मिलता, जिससे ब्लड प्रेशर बढ़ने, सूजन और हार्ट से जुड़ी समस्याओं का खतरा बढ़ जाता है।
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अध्ययन में यह भी सामने आया है कि जिन लोगों की नींद रात में 2 से 3 बार टूटती है, उनमें हृदय रोगों का खतरा करीब 30 फीसदी तक बढ़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि नींद का बार-बार टूटना इस बात का संकेत है कि व्यक्ति का दिमाग पूरी तरह आराम की स्थिति में नहीं जा पा रहा। इसके पीछे मानसिक तनाव, ज्यादा सोच-विचार और डिजिटल स्क्रीन का अत्यधिक इस्तेमाल प्रमुख कारण हैं।
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स्वास्थ्य जानकारों के अनुसार, स्लीप एपनिया से पीड़ित लोग, लगातार तनाव में रहने वाले व्यक्ति और सोने से पहले मोबाइल या टीवी देखने वाले लोग इस समस्या के ज्यादा शिकार हो रहे हैं। ऐसे में बचाव के लिए जरूरी है कि सोने से पहले स्क्रीन से दूरी बनाई जाए, सोने-जागने का समय तय किया जाए और कैफीन युक्त पेय पदार्थों से परहेज किया जाए।
विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि अगर यह समस्या लंबे समय तक बनी रहे, तो बिना देरी किए डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए, क्योंकि समय पर सावधानी ही दिल और दिमाग को स्वस्थ रखने की कुंजी है।

















