चंडीगढ़ | राजवीर दीक्षित
(Significance of Navratri Day 3) नवरात्रि के तीसरे दिन मां दुर्गा के चंद्रघंटा स्वरूप की पूजा की जाती है, जो शक्ति, साहस और शांति का प्रतीक मानी जाती हैं। मान्यता है कि मां चंद्रघंटा अपने भक्तों के सभी दुखों को दूर करती हैं और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करती हैं। उनके मस्तक पर घंटी के आकार का अर्धचंद्र सुशोभित होता है, जिसके कारण उन्हें चंद्रघंटा कहा जाता है।
मां चंद्रघंटा का स्वरूप बेहद दिव्य और आकर्षक माना जाता है। उनके दस हाथों में विभिन्न अस्त्र-शस्त्र होते हैं, जो बुराई के विनाश और धर्म की रक्षा का संकेत देते हैं। उनका यह रूप शांत भी है और उग्र भी, जो भक्तों को निर्भय और मजबूत बनाता है। इस दिन उनकी पूजा करने से व्यक्ति के जीवन में साहस, आत्मविश्वास और सफलता आती है।
पूजा के लिए सुबह सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करना शुभ माना जाता है। इसके बाद लाल वस्त्र पहनकर मां को लाल फूल, लाल चंदन और पीले गेंदा अर्पित किए जाते हैं। मां को दूध या दूध से बनी मिठाई का भोग लगाना विशेष फलदायी माना जाता है। पूजा के बाद प्रसाद को परिवार और जरूरतमंदों में बांटना चाहिए।
ज्योतिष के अनुसार मां चंद्रघंटा का संबंध मंगल ग्रह से है। जिन लोगों की कुंडली में मंगल दोष होता है, उन्हें इस दिन विशेष रूप से पूजा करनी चाहिए। “ॐ अंगारकाय नमः” मंत्र का जाप करने से मंगल दोष से राहत मिलती है और जीवन में स्थिरता आती है।
नवरात्रि का तीसरा दिन विशेष रूप से भय और नकारात्मकता को दूर करने के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। मां चंद्रघंटा की कृपा से व्यक्ति के अंदर साहस और विनम्रता दोनों का विकास होता है, जिससे जीवन में संतुलन और सफलता प्राप्त होती है।



















